तिरुमला। उगादी के उपलक्ष्य में कोइल अलवार तिरुमंजनम अनुष्ठान (Thirumanjanam Ritual) का आयोजन तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर की शुद्धि के लिए विशेष सुगंधित पदार्थों का प्रयोग किया गया। अनुष्ठान के पश्चात पूजा-अर्चना और नैवेद्य अर्पित किया गया। उसके बाद श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई। टीटीडी अध्यक्ष बी.आर. नायडू ने कहा कि इस पवित्र अनुष्ठान में भाग लेना सौभाग्य की बात है। अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी च. वेंकैय्या चौधरी (Ch. Venkayya Chaudhary) ने बताया कि यह परंपरा प्रमुख त्योहारों से पहले निभाई जाती है।
तिरुपति से तिरुमला कितनी दूर है?
लगभग 20 से 22 किलोमीटर की दूरी तिरुपति और तिरुमला के बीच है। यह रास्ता पहाड़ियों से होकर गुजरता है, जिसे बस, टैक्सी या निजी वाहन से तय किया जा सकता है। यात्रा में सामान्यतः 45 मिनट से 1 घंटा लगता है। पैदल जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग मार्ग भी है, जिसकी लंबाई करीब 9 से 11 किलोमीटर होती है और इसमें 3 से 5 घंटे लग सकते हैं।
तिरुपति बालाजी कब जाना चाहिए?
दर्शन के लिए तिरुपति बालाजी मंदिर का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है, जब मौसम सुहावना रहता है। सप्ताह के बीच के दिनों में भीड़ कम रहती है, इसलिए यह समय अधिक सुविधाजनक होता है। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान भारी भीड़ देखने को मिलती है, इसलिए सुबह जल्दी या देर रात का समय चुनना बेहतर रहता है।
तिरुपति में 300 रुपये के दर्शन करने में कितने घंटे लगेंगे?
आमतौर पर तिरुपति बालाजी मंदिर में 300 रुपये वाले शीघ्र दर्शन के लिए 2 से 4 घंटे का समय लगता है। भीड़ अधिक होने पर यह समय बढ़कर 5 से 6 घंटे तक हो सकता है। सामान्य दिनों में प्रक्रिया अपेक्षाकृत जल्दी पूरी हो जाती है, जबकि विशेष अवसरों और छुट्टियों में प्रतीक्षा समय अधिक हो जाता है।
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