Hyderabad : केंद्रीय बजट कॉरपोरेट्स के लिए वरदान, गरीबों के लिए निराशाजनक – सीपीआई

By Ajay Kumar Shukla | Updated: February 2, 2026 • 12:23 PM

हैदराबाद। सीपीआई (CPI) एमएलसी नेल्लिकंती सत्यम ने केंद्रीय बजट 2026–27 की कड़ी आलोचना करते हुए इसे पूरी तरह निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना से हजारों करोड़ रुपये कर के रूप में केंद्र को जाने के बावजूद राज्य के साथ एक बार फिर भेदभाव किया गया है। उन्होंने कहा कि काज़ीपेट कोच फैक्ट्री और बय्याराम स्टील प्लांट जैसे विभाजन वादों का बजट में उल्लेख तक न होना केंद्र सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। कृषि प्रधान देश होने के बावजूद किसानों की उपेक्षा की गई है और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कानून पर कोई घोषणा नहीं की गई।

उर्वरक सब्सिडी में कटौती से किसानों पर पड़ेगा भारी बोझ

नेल्लिकंती सत्यम ने कहा कि उर्वरक सब्सिडी में कटौती से नलगोंडा जैसे कृषि-आधारित जिलों के किसानों पर भारी बोझ पड़ेगा। उन्होंने हथकरघा क्षेत्र के साथ भी अन्याय का आरोप लगाते हुए कहा कि पोचमपल्ली, नारायणपुर और पुट्टपाका जैसे क्षेत्रों के बुनकर लंबे समय से जीएसटी छूट की मांग कर रहे हैं, लेकिन बजट में कोई राहत नहीं दी गई। उन्होंने नलगोंडा जिले में फ्लोरोसिस पीड़ितों के पुनर्वास और फ्लोरोसिस अनुसंधान केंद्र को मजबूत करने के लिए विशेष धनराशि न दिए जाने पर भी नाराजगी जताई। क्षेत्रीय रिंग रोड (आरआरआर) के लिए भूमि अधिग्रहण में केंद्र के हिस्से को लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं है।

महंगाई बढ़ने का बताया कारण

उन्होंने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में न लाने को महंगाई बढ़ने का कारण बताया और कहा कि बढ़ती बेरोजगारी के बावजूद युवाओं के लिए रोजगार सृजन की कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने इस बजट को पूरी तरह कॉरपोरेट समर्थक बताते हुए कहा कि गरीब, किसान, मजदूर, महिला और मध्यम वर्ग के लिए इसमें कुछ भी नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी विधानसभा सत्रों में राज्य के अधिकारों के लिए जोरदार संघर्ष किया जाएगा।

2025 से 2026 के लिए केंद्रीय बजट क्या है?

भारत सरकार का केंद्रीय बजट 2025–26 उस वित्तीय वर्ष की आर्थिक रूपरेखा है जो 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक लागू रहती है। इसमें सरकार की आय, खर्च, कर नीतियाँ और विकास प्राथमिकताएँ तय की जाती हैं। बजट में आम तौर पर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचा, सामाजिक कल्याण और रोजगार पर ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, महंगाई नियंत्रित रखना और समाज के कमजोर वर्गों को राहत देना होता है।

2025 से 2026 के लिए बजट क्या है?

असल में, बजट 2025–26 भारत की आर्थिक योजना का आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसे केंद्र सरकार संसद में प्रस्तुत करती है। यह बताता है कि सरकार अगले एक साल में पैसा कहाँ से जुटाएगी और किन क्षेत्रों में खर्च करेगी। इसमें टैक्स से जुड़े प्रस्ताव, सब्सिडी, योजनाएँ और नीतिगत सुधार शामिल रहते हैं। बजट का मुख्य लक्ष्य राजकोषीय संतुलन बनाए रखते हुए विकास, निवेश और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना होता है।

2026 में बजट कब आएगा?

सामान्यतः, भारत में केंद्रीय बजट हर साल 1 फरवरी को पेश किया जाता है। इसी परंपरा के अनुसार 2026 का बजट भी 1 फरवरी 2026 को संसद में प्रस्तुत किया जाना तय होता है। यह बजट वित्त वर्ष 2026–27 के लिए होता है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होता है। फरवरी में बजट पेश करने का उद्देश्य यह होता है कि संसद को बजट पर चर्चा और मंजूरी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

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