हैदराबाद। कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव (Tummala Nageswara Rao) ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि राज्य में यूरिया की कोई कमी नहीं है, और पर्याप्त खाद भंडार उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि वितरण पर सतत निगरानी की जा रही है। मंत्री ने बताया कि पिछले खरीफ सत्र में केंद्र से आयात में देरी और रामागुंडम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (Ramagundam Fertilizers and Chemicals Limited) के अस्थायी बंद होने के बावजूद राज्य सरकार ने पर्याप्त यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित की। इस दौरान 9.79 लाख मीट्रिक टन यूरिया आपूर्ति की गई, जो 2024–25 के खरीफ सत्र से 13,000 मीट्रिक टन अधिक है।
राज्य में 1.67 लाख एमटी यूरिया
उन्होंने यह भी कहा कि इस रबी मौसम में 3.93 लाख मीट्रिक टन यूरिया बिक्री 31 दिसंबर तक हो चुकी थी और कुल बिक्री अब 4.52 लाख मीट्रिक टन हो गई है। राज्य में 1.67 लाख एमटी यूरिया, 51,458 एमटी डीएपी , 2.67 लाख एमटी कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर, 22,367 एमटी एसएसपी, और 30,880 एमटी अन्य खादें उपलब्ध हैं। यूरिया मोबाइल ऐप के पायलट प्रयोग के माध्यम से 1.59 लाख किसान अब तक 4.55 लाख बैग यूरिया खरीद चुके हैं। मंत्री ने कहा कि ऐप सफल होने पर इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसानों को बिना रुकावट खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यूरिया किस चीज से बनता है?
रासायनिक रूप से यह पदार्थ अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड के संयोजन से तैयार किया जाता है। औद्योगिक प्रक्रिया में पहले अमोनिया बनाई जाती है, फिर उसे कार्बन डाइऑक्साइड के साथ उच्च ताप और दबाव में मिलाया जाता है। इससे यूरिया का निर्माण होता है। खेती में उपयोग होने वाला यूरिया सफेद दानेदार रूप में मिलता है और इसमें नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होती है, जो पौधों की वृद्धि के लिए जरूरी मानी जाती है।
यूरिया का क्या काम है?
खेती में इसका मुख्य उपयोग फसलों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। नाइट्रोजन से पौधों की पत्तियां हरी होती हैं और उनकी बढ़वार तेजी से होती है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र में रसायन, प्लास्टिक और दवाइयों के निर्माण में भी इसका इस्तेमाल होता है। मानव शरीर में यूरिया एक अपशिष्ट पदार्थ के रूप में बनता है, जो किडनी के जरिए मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है।
यूरिया का रेट क्या है?
सरकार द्वारा तय कीमत के अनुसार किसानों को सब्सिडी वाला यूरिया उपलब्ध कराया जाता है। भारत में 45 किलो की एक बोरी यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य लगभग 266 रुपये के आसपास होता है। यह दर पूरे देश में लगभग समान रखी जाती है। खुले बाजार में औद्योगिक उपयोग के लिए यूरिया का दाम अलग हो सकता है, लेकिन कृषि के लिए सरकार नियंत्रित मूल्य पर ही बिक्री करती है।
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