हैदराबाद। गुड़िमलकापुर पुलिस (Gudimalkapur Police) ने नकली भारतीय मुद्रा के लेन-देन के आरोप में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई अवलॉन अपार्टमेंट्स, नानाल नगर, हैदराबाद में हुई। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बाबुलाल जाटकुना, निवासी राजस्थान, धर्मवीर, निवासी राजस्थान, अवेयस हर्सी सालड (Aweys Hersi Salad) निवासी हैदराबाद शामिल है। जानकारी मिलने के बाद च. सुरेश, सब-इंस्पेक्टर, गुदिमालकपुर पुलिस स्टेशन और उनके स्टाफ ने घटनास्थल पर तुरंत कार्रवाई की। वहां पुलिस ने तीनों आरोपियों को नकली मुद्रा के विवाद को लेकर झगड़ते हुए पाया और मौके पर ही उन्हें गिरफ्तार किया।
बाबुलाल और धर्मवीर राजस्थान से आए थे हैदराबाद
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि बाबुलाल और धर्मवीर राजस्थान से हैदराबाद आए थे ताकि अवेयस को नकली नोट सौंप सकें। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10-बंडल में 500 नकली नोट, 4 मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल जब्त किए। गिरफ्तारी के दौरान इस कार्रवाई का नेतृत्व एस. सुदर्शन, सहायक पुलिस आयुक्त, कुलसुमपुरा डिवीजन ने किया। बी. राजू, इंस्पेक्टर, गुदिमालकपुर पुलिस स्टेशन, च. सुरेश, सब-इंस्पेक्टर और स्टाफ की सहायता से आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस अब नकली मुद्रा के स्रोत, नेटवर्क और वितरण चैन को ट्रेस करने में जुटी है।
भारतीय मुद्रा क्या है?
देश में लेन-देन के लिए प्रयुक्त आधिकारिक धन को रुपया कहा जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर INR के नाम से पहचाना जाता है। यही माध्यम वस्तुओं, सेवाओं, वेतन और सरकारी भुगतान के लिए पूरे भारत में मान्य है।
भारतीय मुद्रा कब शुरू की गई थी?
स्वतंत्रता के बाद मौजूदा मौद्रिक व्यवस्था को औपचारिक रूप से अपनाया गया। वर्ष 1947 के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक के माध्यम से देश की अपनी मुद्रा जारी की गई, जिसने ब्रिटिश काल की प्रणाली को प्रतिस्थापित किया।
भारतीय मुद्रा की शुरुआत कब हुई थी?
इतिहास की दृष्टि से देखें तो भारत में सिक्कों और मुद्रा का प्रयोग प्राचीन काल से होता रहा है। आधुनिक रुपया प्रणाली को दशमलव रूप में 1957 में लागू किया गया, जिससे पैसा और रुपया का वर्तमान स्वरूप स्थापित हुआ।
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