हैदराबाद। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी (G Kishan Reddy) ने कहा कि केंद्र की महत्वाकांक्षी पीएम गति शक्ति पहल के तहत देश की पहली समर्पित फार्मा कार्गो ट्रेन, ‘औषधि एक्सप्रेस’ के शुभारंभ के साथ भारतीय रेलवे ने दवा परिवहन में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री ने सोमवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि 2 मई को शुरू की गई रेफ्रिजरेटेड ट्रेन सेवा, हैदराबाद से – जिसे व्यापक रूप से भारत (India) की फार्मा राजधानी माना जाता है – घरेलू और अंतरराष्ट्रीय वितरण के लिए जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक दवा उत्पादों का परिवहन करेगी। किशन रेड्डी ने तेलंगाना के लिए पहली नियमित ‘औषधि एक्सप्रेस’ सेवा आवंटित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को धन्यवाद दिया।
काफी लाभ पहुंचाएगी रेफ्रिजरेटेड ट्रेन
उन्होंने कहा कि उन्नत शीत भंडारण सुविधाओं से लैस यह रेफ्रिजरेटेड ट्रेन हैदराबाद के जीनोम वैली, जीदीमेटला औद्योगिक क्षेत्र, पटनचेरु फार्मा जोन और मुचेरला के फ्यूचर सिटी में स्थित दवा कंपनियों को तापमान के प्रति संवेदनशील दवाओं के सुरक्षित और समय पर परिवहन को सुनिश्चित करके काफी लाभ पहुंचाएगी। मंत्री जी के अनुसार, यह सेवा कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के अंतर्गत सनथ नगर स्थित अंतर्देशीय कंटेनर डिपो से संचालित होती है। निर्बाध शीतलन बनाए रखने और दवाओं की गुणवत्ता को संरक्षित करने के लिए पूरी यात्रा के दौरान डीजल से चलने वाले रेफ्रिजरेटर कंटेनरों का उपयोग किया जा रहा है।
किशन रेड्डी ने कहा कि इस पहल से कोल्ड-चेन कनेक्टिविटी मजबूत होती है, परिवहन समय कम होता है और परिचालन लागत घटती है, साथ ही दवा आपूर्ति श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार होता है। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि ट्रेन वर्तमान में सप्ताह में एक बार चलती है, लेकिन बाजार की मांग और व्यापार की आवश्यकताओं के आधार पर इसकी आवृत्ति को सप्ताह में दो बार करने के प्रयास जारी हैं।
10 औषधीय पौधे कौन से हैं?
तुलसी, नीम, एलोवेरा, अश्वगंधा, गिलोय, आंवला, हल्दी, ब्राह्मी, पुदीना और अर्जुन जैसे पौधों को औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। इनका उपयोग आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से किया जाता रहा है। कई पौधे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन सुधारने और त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभकारी माने जाते हैं। कुछ जड़ी-बूटियां मानसिक तनाव कम करने और शरीर को ऊर्जा देने में भी उपयोगी मानी जाती हैं। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों में इनका विशेष महत्व बताया जाता है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इनका उपयोग आम रूप से किया जाता है।
औषधि का देवता कौन है?
हिंदू मान्यताओं में Dhanvantari को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान वे अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। आयुर्वेद में उन्हें स्वास्थ्य और उपचार का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस के अवसर पर कई लोग उनकी पूजा भी करते हैं। चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोग विशेष श्रद्धा रखते हैं। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में भी उनका उल्लेख मिलता है और उन्हें रोगों से मुक्ति देने वाला देवता माना गया है।
औषधि का अर्थ क्या होता है?
ऐसा पदार्थ या दवा जिसका उपयोग रोगों के उपचार, दर्द कम करने या स्वास्थ्य सुधारने के लिए किया जाए, उसे औषधि कहा जाता है। यह प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, रसायनों या अन्य चिकित्सा सामग्री से तैयार की जा सकती है। आयुर्वेद, होम्योपैथी और एलोपैथी जैसी विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में अलग-अलग प्रकार की दवाओं का उपयोग किया जाता है। सही मात्रा और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सेवन करना जरूरी माना जाता है। स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और बीमारियों से राहत देने में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है।
नसों के लिए कौन सी आयुर्वेदिक दवा सबसे अच्छी है?
आयुर्वेद में अश्वगंधा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी और जटामांसी जैसी जड़ी-बूटियों को नसों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। ये शरीर को शांत रखने, तनाव कम करने और तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाने में मददगार बताई जाती हैं। कई आयुर्वेदिक चिकित्सक स्मरण शक्ति और मानसिक संतुलन सुधारने के लिए भी इनका उपयोग करने की सलाह देते हैं। हालांकि किसी भी दवा का सेवन विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और समस्या के अनुसार उपचार अलग हो सकता है।
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