251 करोड़ रुपये से मेड़ाराम का विकास
हैदराबाद। मेडाराम में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध साम्मक्का–सारलम्मा महाजातरा (Sammakka Saralamma Jathara) को इस बार इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। राज्य की महिला एवं बाल कल्याण तथा पंचायती राज मंत्री दानसारी सीतक्का (अनसूया) ने कहा कि यह महाजातरा और इससे जुड़े स्थायी निर्माण कार्य विश्व इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होंगे।मंत्री सीतक्का ने बताया कि साम्मक्का–सारलम्मा गद्देल (Sammakka–Saarlamma Gaddel) (पवित्र चबूतरे) का पुनर्निर्माण इस प्रकार किया जा रहा है कि वे कम से कम 200 से 250 वर्षों तक बिना क्षति के सुरक्षित रहें। इसके लिए गुणवत्ता मानकों में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा रहा है। लगभग 4 हजार टन ग्रेनाइट का उपयोग करते हुए आदिवासी इतिहास और संस्कृति को दर्शाने वाली 7,000 से अधिक शिल्प आकृतियाँ उकेरी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने 251 करोड़ रुपये किए स्वीकृत
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मेड़ाराम के विकास पर विशेष ध्यान देते हुए 251 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इनमें से 101 करोड़ रुपये केवल वनोदेवताओं के गद्देल के विस्तार और पुनर्निर्माण पर खर्च किए जा रहे हैं। सरकार अस्थायी सुविधाओं के बजाय स्थायी संरचनाओं पर फोकस कर रही है। उन्होंने बताया कि आगामी वर्ष 28 से 31 जनवरी तक आयोजित होने वाली महा जातरा में तेलंगाना के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन व्यवस्था को एक ही क्रमबद्ध पंक्ति में सुगम बनाया जा रहा है।मंत्री सीतक्का ने स्पष्ट किया कि सभी निर्माण कार्य आदिवासी पुजारियों के संघ की सहमति से ही किए जा रहे हैं। हर संरचना में आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का प्रतिबिंब दिखाई देगा।
गद्देल परिसर की दीवारों और प्रवेश द्वारों पर उकेरा गया इतिहास
930 वर्ष पुराने कोया समुदाय के ताड़पत्र ग्रंथों में वर्णित इतिहास को शिल्प रूप में गद्देल परिसर की दीवारों और प्रवेश द्वारों पर उकेरा गया है। मुख्य स्वागत द्वार पर साम्मक्का वंश के इतिहास को दर्शाने वाली 59 आकृतियाँ बनाई गई हैं।गद्देल परिसर के आसपास मौजूद पुराने वृक्षों को हटाए बिना विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त 12 प्रकार के पवित्र वृक्ष और 140 प्रकार के औषधीय पौधे लगाए जा रहे हैं, जिससे वनदेवता परंपरा और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिलेगा। पुनर्निर्माण कार्यों की गति बनाए रखने के लिए मंत्रियों की टीम प्रतिदिन समीक्षा कर रही है।
रोजाना कार्यों की प्रगति की जानकारी ले रहे हैं मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी स्वयं हैदराबाद से रोजाना कार्यों की प्रगति की जानकारी ले रहे हैं। फिलहाल सभी कार्य अंतिम चरण में हैं और शीघ्र ही पूरे होने की उम्मीद है। मंत्री सीतक्का ने कहा कि इस बार की साम्मक्का–सारलम्मा महा जातरा अब तक की सबसे भव्य और ऐतिहासिक होगी और सभी श्रद्धालुओं से इसके सफल आयोजन में सहयोग की अपील की। इस अवसर पर जिला कलेक्टर दिवाकर टी.एस., एसपी सुधीर राम नाथ केकन, संबंधित अधिकारी, पुजारी संघ के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सम्मक्का सरलम्मा जातरा कहाँ मनाया जाता है?
तेलंगाना राज्य के मुलुगु जिले के मेदарам वन क्षेत्र में यह प्रसिद्ध जातरा मनाई जाती है। हर दो वर्ष में आयोजित होने वाला यह आयोजन एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी मेला माना जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
सम्मक्का सरक्का क्या है?
तेलंगाना के कोया आदिवासी समुदाय की आदिवासी देवी-पूजा परंपरा को यही नाम दिया गया है। इसमें मां-बेटी के रूप में पूजी जाने वाली सम्मक्का और सरक्का को प्रकृति, शक्ति और आदिवासी आत्मसम्मान का प्रतीक माना जाता है।
सम्मक्का सरक्का की असली कहानी क्या है?
लोककथाओं के अनुसार, काकतीय शासकों के अत्याचारों के खिलाफ सम्मक्का ने आदिवासियों का नेतृत्व किया। संघर्ष में वीरगति प्राप्त करने के बाद उन्हें देवी के रूप में पूजा जाने लगा। उनकी बेटी सरक्का भी इसी संघर्ष की प्रतीक बनीं, जिससे यह जातरा प्रचलित हुई।
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