हैदराबाद। डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी (DGP B. Shivadhar Reddy) ने कहा कि गांव से लेकर जिला स्तर तक ट्रैफिक सुरक्षा समितियाँ बनाई जाएंगी, जिसमें सरपंच, वार्ड सदस्य, शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, युवा, ऑटो चालक और ट्रैक्टर मालिक शामिल होंगे। 13 से 24 जनवरी तक दस कार्य दिवसों के लिए अभियान चलाया जाएगा, जिसमें हर दिन को अलग विषय को समर्पित किया गया है। इसमें ग्राम स्तर की बैठकें, स्कूलों में जागरूकता (awareness), ऑटो-बस-कैब चालक प्रशिक्षण, पतंग उत्सव, रंगोली प्रतियोगिता, ब्लॉक स्पॉट्स पर विशेष प्रचार और शराब पीकर ड्राइविंग की जांच शामिल हैं। कार्यक्रम में एमपी अनिल कुमार यादव, विधायक नवीन यादव, मक्कन सिंह ठाकुर, होम डिपार्टमेंट के विशेष मुख्य सचिव सी. वी. आनंद, हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी. सी. सज्जनार सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण क्या है?
तेज रफ्तार को सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। इसके अलावा ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, शराब या नशे में वाहन चलाना, मोबाइल फोन का इस्तेमाल, गलत ओवरटेकिंग, खराब सड़कें और वाहन की तकनीकी खराबी भी दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ाती हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनना चोट और मृत्यु के खतरे को और गंभीर बना देता है।
एक्सीडेंट करने पर कौन सी धारा लगती है?
दुर्घटना की स्थिति और गंभीरता के आधार पर अलग-अलग धाराएं लगती हैं। सामान्य लापरवाही पर भारतीय दंड संहिता की धारा 279 (लापरवाह वाहन चलाना) लागू होती है। चोट लगने पर 337 या 338 और मृत्यु होने पर 304A (लापरवाही से मृत्यु) लग सकती है। साथ ही मोटर वाहन अधिनियम के तहत भी कार्रवाई होती है।
एक्सीडेंट की रिपोर्ट कैसे लिखें?
घटना की सही तारीख, समय और स्थान का उल्लेख करके रिपोर्ट लिखी जाती है। इसमें वाहन नंबर, चालक का नाम, घायल या मृत व्यक्ति का विवरण, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी और दुर्घटना का संक्षिप्त विवरण शामिल किया जाता है। नजदीकी पुलिस थाने में लिखित शिकायत या एफआईआर दर्ज कराई जाती है। फोटो और मेडिकल रिपोर्ट संलग्न करना उपयोगी होता है।
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