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Crime : साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 10, 2026 • 10:02 PM
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हैदराबाद। मल्काजगिरी कमिश्नरेट की साइबर क्राइम (Cyber Crime) पुलिस ने निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एक सप्ताह के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 3 मई से 9 मई 2026 के बीच की गई इस जांच में पुलिस ने पाया कि इन साइबर अपराधियों के तार पूरे भारत में फैले हुए हैं। पुलिस ने न केवल आरोपियों को पकड़ा, बल्कि न्यायालय के माध्यम से सक्रिय कार्रवाई करते हुए पीड़ितों के 4,31,180 रुपए वापस दिलाने में भी सफलता प्राप्त की है। मल्काजगिरी की पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) बी. सुमति ने बताया कि ठगी के पहले मामले में जालसाजों ने एक फर्जी वेबसाइट और व्हाट्सएप के जरिए बिटकॉइन ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से 34,48,030 रुपए की ठगी की।

कमीशन पर बैंक खाते मुहैया कराता था रौम्या रंजन

इस मामले में पुलिस ने ओडिशा निवासी रौम्या रंजन पांडा को गिरफ्तार किया है, जो ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए कमीशन पर बैंक खाते मुहैया कराता था। दूसरे मामले में एक एप के जरिए स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर एक अन्य पीड़ित से 41.56 लाख रुपए की धोखाधड़ी की गई। इस मामले में आंध्र प्रदेश के गुंटूर निवासी ऑटुकुरी संतोष कुमार को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाले लुभावने निवेश प्रस्तावों और अज्ञात ट्रेडिंग एप्स से सावधान रहें। किसी भी अनजान लिंक के माध्यम से निवेश न करें और यदि कोई खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताकर डराने की कोशिश करे, तो तुरंत इसकी पुष्टि करें। किसी भी तरह की धोखाधड़ी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

साइबर ठगी होने पर क्या करें?

तुरंत बैंक या भुगतान सेवा को सूचना देकर लेनदेन रोकने की कोशिश करनी चाहिए। इसके बाद 1930 हेल्पलाइन या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। स्क्रीनशॉट, मैसेज, कॉल रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन विवरण सुरक्षित रखना जरूरी होता है, ताकि जांच में मदद मिल सके।

साइबर ठग क्या होता है?

इंटरनेट, मोबाइल या डिजिटल माध्यम से लोगों को धोखा देकर पैसा या निजी जानकारी हासिल करने वाले व्यक्ति को साइबर ठग कहा जाता है। ऐसे लोग फर्जी लिंक, नकली कॉल, OTP धोखाधड़ी और सोशल मीडिया स्कैम जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

साइबर ठगी में कितने साल की सजा होती है?

ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में सजा अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है। Information Technology Act 2000 और भारतीय दंड संहिता के तहत कई मामलों में 3 साल से 7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। बड़े आर्थिक अपराधों में सजा और अधिक कठोर हो सकती है।

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