हैदराबाद। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के राज्य सचिव (state Secretary) और विधायक कुनामनेनी संबाशिवा राव ने परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष द्वारा इस विधेयक को रोके जाने से लोकतंत्र की जीत हुई है। शहर में आयोजित सीपीआई मेडचल-मलकाजगिरि जिला समिति की बैठक में उन्होंने इस विधेयक को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार इसे बिना पारदर्शिता के लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा कि परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या (population) के आधार पर निष्पक्ष प्रतिनिधित्व होना चाहिए, लेकिन इसका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है।
परिसीमन पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया सरकार को घेरा
राव ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ भेदभाव हो सकता है और उत्तर भारत को अधिक राजनीतिक लाभ मिल सकता है, जिससे संघीय संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन को महिला आरक्षण विधेयक से जोड़ना महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण में देरी करने की रणनीति है। सीपीआई नेता ने लोगों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर जागरूक रहें और सरकार के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक कदम बताते हुए व्यापक विरोध की जरूरत बताई। इस बैठक में पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
CPI का पूरा नाम क्या है?
राजनीतिक संदर्भ में CPI का पूरा नाम कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया है। यह भारत की एक प्रमुख वामपंथी पार्टी है, जो समाजवाद और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है।
सीपीआई का क्या मतलब होता है?
यह संक्षिप्त रूप कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा अलग संदर्भ में CPI का मतलब “Consumer Price Index” (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) भी होता है, जो महंगाई को मापने का एक आर्थिक सूचक है।
सीपी किसकी पार्टी है?
सामान्य रूप से “सीपी” कोई आधिकारिक पार्टी का नाम नहीं है, लेकिन लोग अक्सर इसे कम्युनिस्ट पार्टियों के लिए बोल देते हैं। इसमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) जैसी पार्टियां शामिल होती हैं, जो वामपंथी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
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