रावलपिंडी । पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा (Qamar Javed Bajwa) एक आकस्मिक दुर्घटना के बाद रावलपिंडी स्थित मिलिट्री अस्पताल में उपचाराधीन हैं। अस्पताल और पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, बुधवार सुबह वे अपने घर के वॉशरूम में फिसलकर गिर गए थे।
वॉशरूम में फिसलने से हुआ हादसा
सूत्रों के मुताबिक, इस दुर्घटना में जनरल बाजवा के सिर पर तीन गंभीर चोटें आईं। हादसे के तुरंत बाद उन्हें सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने आपात उपचार शुरू किया।
सिर की सर्जरी सफल, हालत स्थिर
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि चोट की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तत्काल ऑपरेशन का फैसला लिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, जनरल बाजवा की सिर की सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
पूरी तरह ठीक होने में लग सकता है समय
डॉक्टरों का कहना है कि जनरल बाजवा को पूरी तरह स्वस्थ होने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं। उनकी रिकवरी की स्थिति को देखते हुए ही आगे का मेडिकल बुलेटिन (Medical Bulletin) जारी किया जाएगा।
राजनीतिक और सैन्य हलकों में चिंता
जनरल बाजवा की अचानक तबीयत बिगड़ने और सर्जरी की खबर मिलते ही पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य गलियारों में चिंता की लहर दौड़ गई। कई वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
परिवार ने की निजता बनाए रखने की अपील
बाजवा परिवार ने शुभचिंतकों से उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ करने की अपील की है। साथ ही मीडिया से इस मुश्किल समय में परिवार की निजता का सम्मान करने का अनुरोध भी किया गया है।
पाकिस्तान के प्रभावशाली सैन्य नेतृत्वकर्ता रहे बाजवा
जनरल कमर जावेद बाजवा का जन्म 11 नवंबर 1960 को कराची में हुआ था। उन्होंने 1980 में बलूच रेजिमेंट के जरिए पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) में कदम रखा। वर्ष 2016 से 2022 तक वे पाकिस्तान के सेना प्रमुख रहे।
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कार्यकाल में कई अहम घटनाओं के गवाह
तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा नियुक्त बाजवा को 2019 में तीन साल का कार्यकाल विस्तार मिला था। उनके कार्यकाल के दौरान पुलवामा और बालाकोट जैसे भारत-पाक तनावपूर्ण घटनाक्रम, अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन और पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति से जुड़े कई अहम फैसले सामने आए। पाकिस्तान की सुरक्षा और राजनीतिक ढांचे को आकार देने में उनकी भूमिका को ऐतिहासिक माना जाता है।
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