National- खड़गे ने जताई आपत्ति, राज्यसभा वेबसाइट से भाषण के अंश हटाने का आरोप

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: February 14, 2026 • 12:08 AM
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नई दिल्ली,।राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि सदन में उनके दिए गए भाषण का एक हिस्सा राज्यसभा की वेबसाइट से हटा दिया गया है। इस पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी सभी टिप्पणियां नियमों के दायरे में थीं। जवाब में सभापति ने कहा कि वे इस विषय को देखेंगे।

हटाए गए अंश जोड़ने की मांग

खड़गे ने सदन में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि जिन अंशों को वेबसाइट से हटाया गया है, उन्हें वापस जोड़ा जाए। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitaraman) ने कहा कि सदन की कार्यवाही से जुड़े ऐसे फैसले सभापति के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और उनके विवेक से लिए गए निर्णय पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर भाषण का मामला

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, खड़गे ने बताया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दिए गए उनके भाषण का बड़ा हिस्सा बिना किसी उचित कारण के हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने राज्यसभा की वेबसाइट देखी तो वहां उनके भाषण के कई अंश मौजूद नहीं थे।

सरकार और पीएम की आलोचना वाले हिस्से हटाने का आरोप

खड़गे के अनुसार, जिन हिस्सों को रिकॉर्ड (Record) से बाहर किया गया है, उनमें उन्होंने वर्तमान सरकार के कार्यकाल में संसदीय कामकाज की स्थिति पर तथ्यात्मक टिप्पणियां की थीं और कुछ नीतियों पर पीएम मोदी की आलोचना की थी।

पांच दशक के संसदीय अनुभव का हवाला

उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में नीतियों पर सवाल उठाना उनका दायित्व है। उनका संसदीय जीवन पांच दशक से अधिक का रहा है और वे सदन की गरिमा, नियमों और परंपराओं से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके भाषण में कोई भी असंसदीय या मानहानिकारक शब्द नहीं था।

सभापति से पुनर्विचार का आग्रह

खड़गे ने सभापति से हटाए गए अंशों पर पुनर्विचार कर उन्हें रिकॉर्ड में बहाल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि सदन में उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे जनता के बीच अपने भाषण का अनरिकॉर्डेड संस्करण साझा करने को मजबूर होंगे।

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सभापति की असहमति

इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह तरीका उचित नहीं है और लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप भी नहीं। उन्होंने कहा कि पीठ को इस तरह निर्देश देना गलत है।

नियमों के तहत अंतिम फैसला पीठ का

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोहराया कि सदन की कार्यवाही नियमों से संचालित होती है और अंतिम निर्णय पीठ का होता है। उन्होंने कहा कि पीठ के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि सदन की गरिमा बनी रहे।

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