Trump के ‘चीन + भारत + रूस’ वाले ट्वीट के मायने: अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव की आहट?

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डोनाल्ड ट्रंप
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वॉशिंगटन, 6 सितंबर 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक विवादास्पद ट्वीट के जरिए चीन, भारत और रूस के बीच बढ़ते संबंधों पर तीखा प्रहार किया है। ट्रंप ने लिखा, “Looks like we’ve lost India and Russia to deepest, darkest China” उन्होंने आगे कहा, “May they have a long and prosperous future together

यह टिप्पणी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की हालिया समिट के ठीक बाद आई है, जहां भारत, रूस और चीन ने बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। ट्रंप का यह बयान अमेरिकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा लगता है, लेकिन क्या यह तीनों देशों के गठबंधन को ‘चीन + भारत + रूस’ के रूप में चिह्नित करने का प्रयास है?

अमेरिका लंबे समय से चीन को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानता रहा है, जबकि रूस को यूक्रेन युद्ध के कारण अलग-थलग करने की कोशिश की गई। लेकिन भारत, जो क्वाड (Quad) और इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि SCO समिट के दौरान भारत-रूस-चीन के बीच व्यापार, ऊर्जा और सैन्य सहयोग पर हस्ताक्षरित समझौतों का प्रत्यक्ष परिणाम है। ट्रंप ने भारत और रूस को “dead economies” (मृत अर्थव्यवस्थाएं) तक कहा, जो भारत की तेजी से बढ़ती जीडीपी (विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था) को नजरअंदाज करता है।

इसके मायने गहरे हैं: पहला, अमेरिका की चिंता कि एशिया में एक नया ध्रुव उभर रहा है, जो डॉलर-प्रधान वैश्विक व्यवस्था को चुनौती दे सकता है। रूस-चीन के BRICS विस्तार और भारत की तटस्थता (रूस से तेल आयात जारी) ने वाशिंगटन को परेशान किया है।

लेकिन भारत ने इसका जवाब देते हुए कहा कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है। तीसरा, वैश्विक स्तर पर यह बहुध्रुवीय दुनिया की ओर इशारा करता है, जहां अमेरिका अकेला नहीं रह सकता। ट्रंप के समर्थक इसे ‘सच्चाई’ बताते हैं, जबकि आलोचक इसे कूटनीतिक असफलता का प्रतीक मानते हैं। SCO के बाद यह ट्वीट अमेरिका-भारत संबंधों पर सवाल खड़े करता है।

बाद में ट्रंप अपने बयान से पीछे हटते भी दिखें. राष्ट्रपति ट्रंप से जब इसी पोस्ट को लेकर एक पत्रकार ने सवाल किया और पूछा कि चीन के हाथों भारत को खोने के लिए आप किसे दोषी मानते हैं? तो इस सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि हमने उन्हें खो दिया है. मुझे निराशा है कि भारत रूसी तेल खरीद रहा है और मैंने उन्हें 50% टैरिफ लगाकर बता दिया है. लेकिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मेरी रिश्ते अच्छे हैं. वह कुछ महीने पहले यहां आए थे, हम रोज गार्डन गए थे… हमने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी…”

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ट्रंप के अमेरिका ने “रूस और भारत को सबसे गहरे, सबसे अंधेरे चीन के हाथों खो दिया है” वाले बयान पर पश्चिम एशिया के रणनीतिकार वाइएल अव्वाद ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि ट्रंप की यह टिप्पणी एक महत्वपूर्ण शक्ति और रणनीतिक खिलाड़ी के रूप में भारत के बढ़ते वैश्विक कद को दर्शाती है.

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