काठमांडू । नेपाल को 35 वर्षीय रैपर और इंजीनियर बालेंद्र शाह (Engineer Balendra Shah) के रूप में नया प्रधानमंत्री मिला है। जनता के बीच ‘बालेन’ के नाम से लोकप्रिय शाह ने चार बार के पूर्व प्रधानमंत्री को झापा-5 सीट से करीब 50,000 वोटों से हराकर राजनीति में बड़ा उलटफेर किया है।
जेन-जी आंदोलनों से उभरे नेता
शाह 2025 के जेन-जी प्रदर्शनों के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर उभरे थे। काठमांडू (Kathmandoo) के मेयर रहते हुए उन्होंने अतिक्रमण हटाने और लालफीताशाही कम करने के कदम उठाए, जिससे युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उनके गानों में भी भ्रष्टाचार और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई गई थी।
चुनाव में बड़ी जीत, पीएम पद की शपथ
हाल ही में 5 मार्च को हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) ने 165 सीटों में से 90 से अधिक पर बढ़त हासिल की। इसके बाद शाह ने 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और देश में नई राजनीति की उम्मीदें जगा दीं।
पहले फैसले से बढ़ा विवाद
सत्ता में आते ही बालेंद्र शाह ने कैंपसों में पॉलिटिकल स्टूडेंट यूनियनों पर प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के राजनीतिक जुड़ाव पर भी रोक लगा दी। इस फैसले ने खासकर युवाओं के बीच बहस छेड़ दी है।
90 दिन में बनेंगी नई छात्र परिषदें
सरकार के अनुसार, अगले 90 दिनों के भीतर छात्र यूनियनों की जगह गैर-राजनीतिक छात्र परिषदों का गठन किया जाएगा, जिनके नाम ‘वॉइस ऑफ स्टूडेंट्स’ जैसे होंगे। सरकार का कहना है कि इससे छात्रों की असली आवाज सामने आएगी और राजनीतिक हस्तक्षेप खत्म होगा।
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युवाओं में मिश्रित प्रतिक्रिया
हालांकि, इस फैसले को लेकर युवाओं में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे शिक्षा संस्थानों को राजनीति से मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं, तो वहीं कई छात्र इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश के रूप में देख रहे हैं।
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