ज्यूरिख। फ्रांस, जर्मनी और स्विट्जरलैंड समेत पूरा यूरोप इन दिनों भीषण शीतलहर और बर्फबारी (Snowfall) की चपेट में है। हालात इतने खराब हैं कि ज्यूरिख एयरपोर्ट (Jyurikh Airport) पर खड़े विमान बर्फ से ढक गए, जिसके कारण वे समय पर उड़ान नहीं भर पाए। यहाँ तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे गिर चुका है और विमानों पर बर्फ की मोटी परतें जम गई हैं।
डी-आइसिंग प्रक्रिया के बिना उड़ान पर रोक
इस कड़ाके की ठंड के बीच विमानों को सुरक्षित उड़ान सुनिश्चित करने के लिए एक अनिवार्य तकनीकी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जिसे ‘डी-आइसिंग (D Icing) कहा जाता है। सुरक्षा मानकों के अनुसार, इस प्रक्रिया के बिना किसी भी विमान को रनवे पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
पंखों पर जमी बर्फ क्यों है जानलेवा खतरा
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, पंखों पर जमी बर्फ आसमान में उड़ते जहाज के लिए एक अदृश्य दुश्मन की तरह काम करती है। दरअसल, विमान के विंग्स और कंट्रोल सरफेसेज को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि हवा उनके ऊपर से सुचारू रूप से गुजर सके और विमान को जरूरी ‘लिफ्ट’ मिल सके।
जब इन पर बर्फ या पाला जम जाता है, तो हवा का प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे न केवल विमान का वजन बढ़ता है, बल्कि उसकी एयरोडायनामिक्स क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पंखों पर जमी महज कुछ मिलीमीटर बर्फ भी विमान की ‘लिफ्ट’ को 30 प्रतिशत तक कम कर सकती है और ‘ड्रैग’ को 40 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।
सेंसर में बर्फ जमी तो पायलट को मिल सकता है गलत डेटा
इसके अलावा, विमान के अहम सेंसर जैसे पिटोट ट्यूब में बर्फ जमने से पायलट को ऊंचाई और गति का गलत डेटा मिल सकता है, जिससे हादसे की आशंका बढ़ जाती है। इसी गंभीरता को देखते हुए ज्यूरिख एयरपोर्ट पर सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा रहा है।
24 घंटे काम कर रही टीमें, उड़ानों में देरी संभव
फिलहाल ज्यूरिख एयरपोर्ट पर दर्जनों टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। एक विमान को तैयार करने में बर्फ की मोटाई के आधार पर 5 से 15 मिनट का समय लग रहा है। एयरलाइंस ने यात्रियों को पहले ही सूचित कर दिया है कि इस सुरक्षा प्रक्रिया के कारण उड़ानों में देरी हो सकती है।
Read Also : ट्रंप का ऐतिहासिक कदम, 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संधियों से अमेरिका ने तोड़ा नाता
बर्फ जमने से रोकने के लिए खास केमिकल का छिड़काव
ज्यूरिख एयरपोर्ट के विशेष ‘डी-आइसिंग पैड्स’ पर यह प्रक्रिया बेहद सावधानी से पूरी की जाती है। यहाँ क्रेननुमा डी-आइसिंग ट्रक्स विमान को चारों ओर से घेर लेते हैं। पहले चरण में गर्म पानी और ‘प्रोपलीन ग्लाइकोल’ (टाइप-1 फ्लूइड) का छिड़काव किया जाता है, जिससे जमी बर्फ पिघल जाती है।
इसके बाद, अगर बर्फबारी जारी रहती है तो ‘टाइप-4’ फ्लूइड का इस्तेमाल किया जाता है, जो पंखों पर एक सुरक्षात्मक परत बना देता है और टेक-ऑफ के दौरान नई बर्फ जमने से रोकता है।
Read More :