मुख्य बातें: –
- ‘चावल और अन्य खरीफ फसलों पर मंडरा रहा खतरा
- 77 जिलों में पहले भी धान उत्पादन में आई थी गिरावट
- यूपी, बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्य ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं
नई दिल्ली। भीषण गर्मी और बढ़ती महंगाई के बीच अब देश के सामने कमजोर मानसून (Weak monsoon) का खतरा भी मंडराने लगा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष अल-नीनो सक्रिय होने पर भारतीय मानसून प्रभावित हो सकता है, जिसका सीधा असर चावल समेत खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा। खासकर यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
अल-नीनो से फसलों की पैदावार पर असर
Indian Council of Agricultural Research (ICAR) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया है कि अल-नीनो वाले वर्षों में कई जिलों में खरीफ फसलों की पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।
अध्ययन के अनुसार:
- 77 जिलों में चावल उत्पादन 10 प्रतिशत से ज्यादा घटा
- 65 जिलों में मक्का उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ
- ज्वार और बाजरा जैसी फसलों की पैदावार में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई
क्या है अल-नीनो?
अल-नीनो वह स्थिति है जब प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है।भारत में इसका सबसे बड़ा प्रभाव मानसून पर देखने को मिलता है। अल-नीनो सक्रिय होने पर बारिश कम हो सकती है, जिससे खरीफ सीजन की खेती प्रभावित होती है।
कई राज्यों में बढ़ सकती है परेशानी
अध्ययन में आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, झारखंड और ओडिशा के कई जिलों में धान उत्पादन में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इस वर्ष भी अल-नीनो प्रभावी रहा तो धान की बुवाई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इससे खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
वैज्ञानिकों ने दी तैयारी की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और किसानों को अभी से तैयारी शुरू करनी होगी।
- सूखा सहन करने वाली फसलों को बढ़ावा देना
- किसानों को मौसम आधारित सलाह देना
- सिंचाई व्यवस्था मजबूत करना
- जिला स्तर पर वैकल्पिक रणनीतियां तैयार करना
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अल-नीनो जैसी घटनाएं अब पहले की तुलना में अधिक बार देखने को मिल रही हैं। ऐसे में खेती के पारंपरिक तरीकों में बदलाव जरूरी हो गया है।
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भीषण गर्मी ने बढ़ाई चिंता
उत्तर भारत में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि आने वाले दिनों में इसके 45 डिग्री तक जाने की संभावना जताई गई है। India Meteorological Department (आईएमडी) ने कई क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून की स्थिति में जल संकट और खेती दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
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