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Sudarshan Reddy पर अमित शाह ने लगाए गंभीर आरोप, भड़क उठे कांग्रेसी

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Sudarshan Reddy पर अमित शाह ने लगाए गंभीर आरोप, भड़क उठे कांग्रेसी

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) द्वारा विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी (Sudarshan Reddy) पर लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। शाह ने रेड्डी पर नक्सलवाद को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2011 में सलवा जुडूम मामले में उनके सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने नक्सलवाद को खत्म करने की प्रक्रिया को बाधित किया

क्या था मामला

शाह ने दावा किया कि यदि यह फैसला नहीं आता, तो देश में वामपंथी उग्रवाद 2020 तक समाप्त हो गया होता। इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, इसे “न्यायपालिका का अपमान” और “राजनीतिक बदले की भावना” करार दिया है।

कोंग्रस नेता जय राम रमेश ने कहा ‘निंदनीय’

कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने शाह के बयान को “निंदनीय” बताते हुए कहा कि सुदर्शन रेड्डी एक प्रतिष्ठित न्यायविद हैं, जिन्होंने हमेशा संविधान और कानून के दायरे में काम किया है। उन्होंने कहा, “शाह का यह बयान न केवल रेड्डी की गरिमा पर हमला है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाता है।”

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज ने भी पलटवार करते हुए कहा कि सलवा जुडूम एक जन आंदोलन था, जिसे तत्कालीन भाजपा सरकार ने बिना प्रशिक्षण के युवाओं को हथियार थमाकर गलत दिशा में ले गई थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला संवैधानिक था और इसे नक्सल समर्थन से जोड़ना “हास्यास्पद” है।

सलवा जुडूम पर फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय नहीं

सुदर्शन रेड्डी ने स्वयं शाह के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सलवा जुडूम पर फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की पीठ का सामूहिक निर्णय था। उन्होंने शाह से सवाल किया कि वह इतने सालों तक इस मुद्दे पर चुप क्यों रहे। रेड्डी ने अपनी उम्मीदवारी को “सैद्धांतिक प्रतिस्पर्धा” बताते हुए जोर दिया कि उनकी विचारधारा संविधान और लोकतंत्र पर आधारित है।

18 पूर्व न्यायाधीशों, जिनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ और मदन बी लोकुर शामिल हैं, ने भी शाह की टिप्पणी को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी उच्च पदस्थ राजनेता द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकती है।[]

कांग्रेस ने इस मुद्दे को उपराष्ट्रपति चुनाव में भुनाने की कोशिश की, यह दावा करते हुए कि भाजपा रेड्डी की उम्मीदवारी से बौखला गई है। इस विवाद ने 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव को और रोचक बना दिया है, जहां रेड्डी का मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन से है।

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