H1B Visa News : अमेरिका में पेशेवरों—खासकर भारतीयों—के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले H-1B वीज़ा को पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी शुरू हो गई है। अमेरिकी कांग्रेस सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन ने इस वीज़ा प्रोग्राम को खत्म करने के लिए एक नया बिल लाने का निर्णय लिया है। वर्तमान में H-1B रखने वालों को आगे चलकर स्थायी निवास या नागरिकता मिलने का मार्ग खुला रहता है, लेकिन प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर यह सुविधा पूरी तरह बंद हो सकती है। बिल पारित हुआ तो वीज़ा अवधि पूरी होते ही विदेशी कर्मचारियों को तुरंत अपने देश लौटना अनिवार्य हो जाएगा।
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ग्रीन ने एक्स (Twitter) पर पोस्ट करते हुए कहा कि—“H-1B (H1B Visa News) कार्यक्रम में दशकों से भारी गड़बड़ियां हो रही हैं। अमेरिकी नागरिकों के रोजगार अवसर विदेशी ले जा रहे हैं, इसलिए मैं इस पूरे कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए बिल पेश कर रही हूँ।” उनके अनुसार, केवल स्वास्थ्य क्षेत्र—जैसे डॉक्टर और नर्सों—के लिए ही साल में 10,000 वीज़ा देने की अनुमति रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह छूट भी 10 साल बाद खत्म कर दी जाएगी, ताकि अमेरिकी नागरिक ही भविष्य में मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। ग्रीन का मानना है कि काम खत्म होने के बाद किसी भी विशेष कौशल वाले विदेशी को अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने तो यहां तक मांग की कि विदेशी मेडिकल छात्रों को मिलने वाली Medicare सहायता भी समाप्त कर देनी चाहिए।

ग्रीन के अनुसार, सिर्फ 2023 में ही विदेशों में जन्मे 5,000 से अधिक डॉक्टर अमेरिका में नौकरी पा चुके हैं, जबकि 2024 में अमेरिका में ही मेडिकल पढ़ाई कर चुके 9,000 अमेरिकी छात्र अवसर न मिलने के कारण विदेशी देशों में काम ढूँढने पर मजबूर हो गए। इसे उन्होंने गंभीर अन्याय बताया।
वर्तमान नियमों के तहत, अमेरिका हर साल 65,000 सामान्य पेशेवरों और 20,000 एडवांस डिग्री धारकों को H-1B वीज़ा जारी करता है। बड़ी टेक कंपनियाँ इस नियम का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में विदेशी वर्कर्स—खासकर भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और मेडिकल प्रोफेशनल्स—को अमेरिका लाती हैं। H-1B पर काम करने वालों में भारतीयों का अनुपात सबसे अधिक है।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से ही H-1B वीज़ा पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। उन्होंने एक नियम लागू किया था जिसके अनुसार योग्य H-1B आवेदकों को आवेदन प्रक्रिया में एक लाख डॉलर तक का भुगतान करना पड़ सकता था। यह विदेशी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ बन गया।
इस नए बिल पर अमेरिकी राजनीति और प्रवासी भारतीय समुदाय दोनों की नजरें टिकी हुई हैं।
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