हैदराबाद । तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने राज्य की अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का दौरा कर चार आईपीएस (IPS) अधिकारी प्रशिक्षुओं आयशा फातिमा, मंडहरे सोहम सुनील, मनीषा नेहरा और राहुल कांत को प्रेरक संबोधन दिया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारी तेलंगाना पुलिस अकादमी (TGPA) की निदेशक अभिलाषा विष्ठ भी उपस्थित रहीं।
आधुनिकरण और नई-युग की पुलिसिंग प्राथमिकताएँ
मुख्यमंत्री ने बदलते क्राइम पैटर्न और लोगों की उम्मीदों को देखते हुए तेलंगाना पुलिस में मॉडर्नाइज़ेशन और एडजस्ट करने की ज़रूरत बताई। की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अपराध अब पारंपरिक भौतिक क्षेत्रों से उन्नत साइबर दुनिया में बदल गया है। उन्होंने साइबरक्राइम, नशे से संबंधित अपराध, आर्थिक अपराध और आतंकवाद संबंधी जांच में विशेषज्ञता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया, और हैदराबाद को इन आधुनिक चुनौतियों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया।
विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी अपनाना
मुख्यमंत्री ने समर्पित साइबरक्राइम यूनिट्स की स्थापना करने का आह्वान किया और डिजिटल फॉरेंसिक, मालवेयर विश्लेषण और साइबर जांच में निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को नवीनतम तकनीकी उपकरणों और सर्वोत्तम प्रथाओं, जैसे कि AI और ड्रोन तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे अत्याधुनिक अपराधी नेटवर्क से आगे रह सकें।

आपदा प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण
जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आपदा घटनाओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी ने पुलिस पाठ्यक्रम में आपदा प्रबंधन और जलवायु प्रतिक्रिया प्रशिक्षण को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बड़े पैमाने पर भीड़ नियंत्रण में दक्षता हासिल करने के महत्व को रेखांकित किया, जैसे मेदराम जातरा और गोदावरी पुष्करालु जैसी प्रमुख घटनाओं में। उन्होंने महाराष्ट्र के महाम कुंभ मेला जैसे राष्ट्रीय अनुभव वाले टीमों के साथ सहयोग करने की सिफारिश की।
भाषा और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का महत्व
मुख्यमंत्री ने प्रभावी संवाद की भूमिका को उजागर करते हुए अधिकारियों से जनता से बेहतर जुड़ाव और विश्वास स्थापित करने के लिए तेलुगु भाषा में दक्षता विकसित करने का आग्रह किया। सांस्कृतिक संवेदनशीलता और स्थानीय स्तर पर संपर्क को जनता-केंद्रित policing के लिए आवश्यक गुण बताया गया।
उच्च मानकों और सार्वजनिक विश्वास के प्रति प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों से उच्चतम नैतिक आचरण, पारदर्शिता और त्वरित नागरिक प्रतिक्रिया बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने तेलंगाना पुलिस की सतत सुधार और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित हो और समुदाय के साथ स्थायी विश्वास स्थापित हो।
भारत में कितने आईपीएस हैं?
भारत में लगभग 4,900 से 5,000 के बीच IPS अधिकारी (कैडर + प्रोमोशन दोनों मिलाकर) कार्यरत हैं।
(यह संख्या हर वर्ष रिटायरमेंट और नई भर्तियों के कारण बदलती रहती है।)
देश का पहला IPS कौन था?
भारत में स्वतंत्रता के बाद पहली बार IPS (Indian Police Service) 1948 में बना।
स्वतंत्र भारत के पहले IPS अधिकारी थे:
सी. वी. नारसिम्हन (C.V. Narasimhan)
- 1948 बैच
- बाद में संयुक्त राष्ट्र में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया
- उन्हें आधुनिक भारतीय पुलिस सेवा के शुरुआती स्तंभों में गिना जाता है।
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