वरिष्ठ नागरिक से 59 लाख रुपये की ठगी का मामला
हैदराबाद। साइबर क्राइम पुलिस, हैदराबाद ने चर्चित डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में दो अहम आरोपियों (अकाउंट सप्लायर्स) को गिरफ्तार कर एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह (Interstate cyber fraud gang) का पर्दाफाश किया है। आरोपियों ने एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक (Retired senior citizens) को डराकर 59 लाख रुपये की ठगी की थी। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुरामपुडी चंद्रशेखर (31) और एमांडी वेंकट नवीन (25), दोनों निवासी काकीनाडा, आंध्र प्रदेश के रूप में हुई है।
व्हाट्सएप कॉल के जरिए किया संपर्क
इस संबंध में एफआईआर संख्या 2216/2025 दर्ज कर आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि 4 दिसंबर 2025 को पीड़ित को व्हाट्सएप कॉल के जरिए अज्ञात व्यक्तियों ने खुद को पुलिस व सरकारी अधिकारी बताते हुए संपर्क किया। ठगों ने मानव तस्करी, विदेश नौकरी घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी दी तथा फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर डराया। लगातार गिरफ्तारी की धमकियों के चलते पीड़ित ने 4 से 6 दिसंबर के बीच यूनियन बैंक ऑफ इंडिया खाते से आरटीजीएस के जरिए 59,00,300 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर करते थे ठगी
उप आयुक्त पुलिस, साइबर क्राइम, हैदराबाद, वी. अरविंद बाबू ने बताया कि जांच में सामने आया कि आरोपी संगठित तरीके से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगी करते थे। वे व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से फर्जी दस्तावेज भेजते, पीड़ितों से विभिन्न बैंक खातों में रकम डलवाते और मालिशियस एपीके फाइलों के जरिए इंटरनेट बैंकिंग व एसएमएस तक पहुंच हासिल करते थे। इसके बाद रकम को शेल फर्म खातों के जरिए क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) में बदलकर बायनेंस पी2पी के माध्यम से निकाल लिया जाता था। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हैं और मुख्य आरोपी को अब तक 15 करंट बैंक खाते उपलब्ध कराए गए थे।
गिरफ्तार आरोपी देशभर में 65 साइबर ठगी मामलों में पाए गए हैं संलिप्त
ठगी की रकम क्रिप्टोकरेंसी में लेकर बाद में उसे भारतीय मुद्रा में बदला जाता था। गिरफ्तार आरोपी देशभर में 65 साइबर ठगी मामलों में संलिप्त पाए गए हैं। इनमें तेलंगाना के 5 मामले शामिल हैं। सभी मामलों में अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 5 मोबाइल फोन, 4 चेक बुक, 10 डेबिट कार्ड और 3 पैन कार्ड जब्त किए हैं। अन्य आरोपी फरार हैं। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है। यह कार्रवाई इंस्पेक्टर एन. दिलीप कुमार के नेतृत्व में साइबर क्राइम पुलिस टीम ने की, जिसकी निगरानी एसीपी आर.जी. शिवा मारुति और एसीपी जयपाल रेड्डी ने की।
डिजिटली अरेस्ट क्या होता है?
कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक ऑनलाइन ठगी का तरीका है। इसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI या किसी एजेंसी का अधिकारी बताकर कॉल या वीडियो कॉल से डराते हैं और जांच के नाम पर पैसे या निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचे?
घबराने के बजाय सतर्क रहना सबसे जरूरी है। सरकारी एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करतीं। संदिग्ध कॉल तुरंत काटें, OTP या पैसे साझा न करें, नंबर ब्लॉक करें और 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
डिजिटल अपराध क्या है?
इंटरनेट, मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से किया गया गैरकानूनी कार्य डिजिटल अपराध कहलाता है। इसमें ऑनलाइन ठगी, हैकिंग, फर्जी कॉल, पहचान की चोरी, साइबर धमकी, बैंकिंग फ्रॉड और सोशल मीडिया के जरिए धोखाधड़ी शामिल होती है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :