Breaking News: Infosys: अमेरिका में इंफोसिस शेयरों का तूफान

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शॉर्ट स्क्वीज से मची हलचल

नई दिल्ली: शुक्रवार को इंफोसिस(Infosys) के अमेरिकी शेयरों में ट्रेडिंग शुरू होते ही जबरदस्त उछाल देखने को मिला। अमेरिका(USA) में कंपनी के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स कुछ ही मिनटों में करीब 40 प्रतिशत तक चढ़ गए। इस तेजी से कंपनी का बाजार पूंजीकरण अरबों डॉलर बढ़ गया और एडीआर 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर के पास पहुंच गए। अचानक आई इस तेजी ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान खींच लिया।

यह उछाल ऐसे समय में आया जब न्यूयॉर्क(New York) में बाजार में कारोबार सामान्य से काफी कम था। भारत से जुड़ी इस आईटी दिग्गज कंपनी की ओर से कोई नया नतीजा या घोषणा नहीं की गई थी। ऐसे में यह सवाल उठा कि बिना किसी खबर के शेयरों में इतनी हलचल क्यों हुई। बाजार की धारणा तेजी से शॉर्ट स्क्वीज की ओर मुड़ गई

अचानक उछाल के पीछे कारण

कम लिक्विडिटी और छुट्टी के दिन कम ट्रेडिंग वॉल्यूम ने इस तेजी को और तेज किया। बताया गया कि कुछ बड़े लेंडर्स ने बड़ी संख्या में उधार दिए गए एडीआर शेयर वापस मंगाए। इससे बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या अचानक घट गई और मांग तेजी से बढ़ गई।

इस स्थिति में जिन निवेशकों ने गिरावट की उम्मीद में शॉर्ट पोजीशन ली थी, उन्हें मजबूरी में ऊंचे दामों पर शेयर खरीदने पड़े। हालांकि यह खरीदारी नुकसान से बचने के लिए थी, लेकिन इसने कीमतों को और ऊपर धकेल दिया। नतीजतन कुछ ही मिनटों में असाधारण तेजी देखने को मिली।

शॉर्ट सेलिंग और शॉर्ट स्क्वीज

शॉर्ट सेलिंग एक ऐसी रणनीति है जिसमें निवेशक शेयर उधार लेकर उन्हें तुरंत बेच देते हैं। उनका अनुमान होता है कि कीमत गिरने पर वे सस्ते में वही शेयर वापस खरीदकर मुनाफा कमा लेंगे। यह तरीका आमतौर पर अल्पकालिक ट्रेडिंग में अपनाया जाता है।

इसके उलट शॉर्ट स्क्वीज तब होता है जब शेयर की कीमत गिरने के बजाय अचानक बढ़ने लगती है। ऐसे में शॉर्ट सेलर्स को अपने सौदे बंद करने के लिए तेजी से खरीदारी करनी पड़ती है। इससे मांग बढ़ती है और कीमतें और ऊपर चली जाती हैं, जिससे एक चक्र बन जाता है।

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आगे क्या हो सकता है

इतनी तेज खरीदारी के बाद बाजार में संतुलन बिगड़ जाता है। जब बिकवाली की तुलना में खरीद ज्यादा हो जाती है, तो कीमतें वास्तविक मूल्य से काफी ऊपर पहुंच सकती हैं। इसके अलावा जब शॉर्ट स्क्वीज का असर खत्म होता है, तो शेयरों में तेज गिरावट भी देखी जा सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी तेजी अक्सर अस्थायी होती है। जैसे ही सामान्य ट्रेडिंग वॉल्यूम लौटता है, कीमतें धीरे-धीरे उस स्तर के करीब आ सकती हैं जहां से यह तेजी शुरू हुई थी। इसलिए निवेशकों को ऐसे उतार-चढ़ाव में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

शॉर्ट स्क्वीज निवेशकों के लिए जोखिम क्यों बढ़ाता है

अचानक कीमत बढ़ने से गलत समय पर एंट्री करने वाले निवेशक फंस सकते हैं। तेजी के बाद तेज गिरावट का खतरा बना रहता है। इसलिए बिना ठोस कारण के आई तेजी में जल्दबाजी नुकसानदेह हो सकती है।

ऐसी घटनाओं से सबक क्या लेना चाहिए

बाजार की चाल सिर्फ खबरों पर निर्भर नहीं होती। लिक्विडिटी और ट्रेडिंग स्ट्रक्चर भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। समझदारी यही है कि जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश किया जाए।

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Dhanarekha

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