Ancestral Property: महिला की पैतृक संपत्ति पर पति का हक नहीं

Read Time:  1 min
Ancestral Property
Ancestral Property
FONT SIZE
GET APP

हाईकोर्ट का उत्तराधिकार नियमों पर बड़ा फैसला

अमरावती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार(Ancestral Property) अधिनियम, 1956 की धारा 15(2)(ए) का हवाला देते हुए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। कोर्ट(Court) के अनुसार, यदि किसी हिंदू महिला को अपने माता-पिता से विरासत में संपत्ति मिली है और उसकी मृत्यु बिना किसी संतान या वसीयत के हो जाती है, तो उस संपत्ति पर उसके पति या ससुराल पक्ष का कोई कानूनी अधिकार नहीं होगा। ऐसी स्थिति में वह संपत्ति वापस महिला के पिता के कानूनी वारिसों के पास चली जाएगी। जस्टिस तारलाडा राजशेखर राव ने स्पष्ट किया कि कानून इस मामले में बेहद सख्त और साफ है

नानी की वसीयत और कानूनी विवाद का मामला

यह मामला एक परिवार की संपत्ति(Property) के विवाद से उपजा था, जहाँ एक नानी(Ancestral Property) ने अपनी संपत्ति पहली नातिन को उपहार में दी थी। 2005 में उस नातिन की निसंतान मृत्यु के बाद, नानी ने वह गिफ्ट रद्द कर दूसरी नातिन के नाम वसीयत कर दी। जब मृत नातिन के पति ने इस पर अपना दावा ठोका, तो मामला कानूनी पेचीदगियों में फंस गया। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए साफ किया कि चूंकि पहली नातिन की कोई संतान नहीं थी, इसलिए पिता के पक्ष से मिली संपत्ति पर उसके पति का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कराना कानूनी रूप से गलत था।

अन्य पढ़े: बीजेपी का घोषणापत्र – 5 लाख करोड़ निवेश और ‘जमीन जिहाद’ पर रोक का वादा

भरण-पोषण और पति की आय पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

एक अन्य पारिवारिक विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नियों के पक्ष में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा है कि भरण-पोषण (Maintenance) के मामलों में पति की आय को बढ़ा-चढ़ाकर बताना ‘झूठा बयान’ (Perjury) नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अक्सर पत्नियाँ सटीक जानकारी न होने के कारण ऐसा करती हैं, और सिर्फ इस आधार पर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने पति की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पत्नी पर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15(2)(ए) क्या कहती है?

यह धारा स्पष्ट करती है कि यदि किसी निसंतान हिंदू महिला की मृत्यु बिना वसीयत के होती है, तो उसे अपने माता-पिता से विरासत में मिली संपत्ति उसके पति को न मिलकर, उसके पिता के वारिसों को वापस मिल जाएगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण के मामलों में क्या रियायत दी है?

कोर्ट ने कहा है कि यदि पत्नी मेंटेनेंस केस में पति की आय बढ़ाकर बताती है, तो इसे जानबूझकर दिया गया ‘झूठा बयान’ नहीं माना जाएगा और इस आधार पर पत्नी पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती।

अन्य पढ़े:

Dhanarekha

लेखक परिचय

Dhanarekha

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।