मजबूत अर्थव्यवस्था का साफ संकेत
नई दिल्ली: दिसंबर 2025 में वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी(GST) संग्रह में 6.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान कुल जीएसटी(GST) संग्रह बढ़कर लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह वृद्धि भारत(India) में तेज आर्थिक गतिविधियों और करदाताओं के बेहतर अनुपालन को दर्शाती है। वित्त विशेषज्ञ इसे अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर की अवधि में कुल जीएसटी(GST) संग्रह 8.6 प्रतिशत बढ़कर लगभग 16.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि के 15.2 लाख(Lakh) करोड़ रुपये से काफी अधिक है। साथ ही, कर प्रणाली को सरल बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों का असर भी इन आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।
दिसंबर में कर संग्रह का स्वरूप
दिसंबर 2025 के दौरान केंद्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी संग्रह में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि घरेलू लेनदेन और सेवाओं में मजबूती बनी हुई है। कर आधार के विस्तार से सरकार को स्थिर राजस्व प्राप्त हो रहा है।
एकीकृत जीएसटी में हालांकि साल-दर-साल हल्की गिरावट देखी गई, लेकिन पूरे वित्तीय वर्ष के आंकड़े सकारात्मक बने हुए हैं। इस अवधि में सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी तीनों घटकों में कुल मिलाकर वृद्धि दर्ज की गई, जो प्रणाली के संतुलित प्रदर्शन को दर्शाती है।
रिकॉर्ड संग्रह का इतिहास
वित्तीय वर्ष 2024-25 में जीएसटी प्रणाली ने अब तक का सर्वोच्च स्तर छू लिया था। उस वर्ष कुल सकल जीएसटी संग्रह 22.08 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक था। यह उपलब्धि कर सुधारों की सफलता को दर्शाती है।
उस दौरान औसत मासिक जीएसटी संग्रह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से सबसे अधिक है। इसलिए लगातार बढ़ता संग्रह यह संकेत देता है कि आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और अनुपालन संस्कृति में सुधार हुआ है।
परिषद और सुधारों की भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में जीएसटी परिषद ने प्रणाली को सरल और व्यवसाय-अनुकूल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। 2016 से अब तक परिषद की 55 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें कई बड़े फैसले लिए गए।
3 सितंबर 2025 को अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार लागू किए गए, जिनमें कर ढांचे को चार स्लैब से घटाकर दो मुख्य दरों में समेटा गया। इसके तहत 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दरें तय की गईं, जबकि लक्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर विशेष 40 प्रतिशत दर रखी गई।
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राज्यों का योगदान और निपटान
दिसंबर 2025 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 79,584 करोड़ रुपये का एसजीएसटी निपटान किया गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत अधिक रहा, जिससे राज्यों की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली।
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों ने मजबूत संग्रह दर्ज किया, जबकि कुछ छोटे क्षेत्रों में मामूली गिरावट देखी गई। फिर भी कुल मिलाकर राज्यों को मिलने वाला राजस्व संतोषजनक बना हुआ है।
जीएसटी संग्रह में वृद्धि का अर्थ क्या है
जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि देश में उत्पादन, उपभोग और सेवाओं की मांग बढ़ रही है। इससे सरकार को विकास योजनाओं के लिए अधिक संसाधन मिलते हैं। साथ ही अर्थव्यवस्था की सेहत भी मजबूत दिखाई देती है।
नए जीएसटी सुधारों से आम लोगों को कैसे लाभ
सरल कर दरों से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में पारदर्शिता आती है। व्यापारियों के लिए अनुपालन आसान होता है और उपभोक्ताओं को कर संरचना समझने में सहूलियत मिलती है। इससे समग्र आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है।
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