न्यूयॉर्क। उमर खालिद साल 2020 से दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में यूएपीए (UAPA) के तहत जेल में हैं। हाल ही में दिसंबर में उन्हें अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए संक्षिप्त अंतरिम जमानत मिली थी, जिसके बाद वे अब पुनः जेल वापस जा चुके हैं।
अमेरिकी सांसदों ने रिहाई की मांग की
अमेरिका में उमर खालिद (Umar Khalid) और अन्य मुस्लिम कार्यकर्ताओं की लंबी हिरासत को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी सांसद जेम्स पी. मैकगवर्न सहित आठ विधायकों ने भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
मेयर ममदानी का व्यक्तिगत समर्थन
न्यूयॉर्क शहर के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी (Newly elected Mayor Zohran Mamdani) ने जेल में बंद भारतीय कार्यकर्ता उमर खालिद के प्रति अपना समर्थन जताते हुए उन्हें हाथ से लिखी एक भावुक चिट्ठी भेजी है। भारतीय मूल के मुस्लिम नेता ममदानी ने 1 जनवरी 2026 को मेयर पद की शपथ लेने के साथ ही इस पहल के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है।
चिट्ठी में उमर के साहस की सराहना
इस पत्र में मेयर ममदानी ने उमर खालिद के साहस की सराहना करते हुए लिखा कि वह अक्सर उनके उन शब्दों को याद करते हैं, जिनमें कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने की बात कही गई थी। ममदानी ने दिसंबर 2025 में अमेरिका यात्रा पर गए उमर के माता-पिता से मुलाकात के बाद यह नोट लिखा था। उन्होंने संदेश में स्पष्ट किया कि वे और उनके समर्थक उमर के बारे में सोच रहे हैं। यह पत्र उमर की साथी बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया पर साझा किया है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और जांच पर सवाल
अमेरिकी सांसदों ने अपनी चिट्ठी में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मानवाधिकार संगठनों को ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जो उमर को आतंकवाद से जोड़ते हों। उन्होंने भारत सरकार से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौतों का पालन करने और त्वरित सुनवाई या रिहाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
अंतरराष्ट्रीय चर्चा में उमर खालिद का मामला
न्यूयॉर्क के मेयर और अमेरिकी सांसदों के इन कदमों ने उमर खालिद के मामले को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
उमर खालिद कौन है?
सैयद उमर खालिद (जन्म 11 अगस्त 1987) एक भारतीय छात्र कार्यकर्ता, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व शोधार्थी और जेएनयू में लोकतांत्रिक छात्र संघ (डीएसयू) के पूर्व नेता हैं। उन पर जेएनयू राजद्रोह विवाद में शामिल होने का आरोप है।
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