वॉशिंगटन। वेनेजुएला पर हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका अब यूरोप (Europe) में किसी बड़े अभियान की तैयारी करता नजर आ रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, भारी हथियारों और घातक मिसाइलों से लैस दर्जनों अमेरिकी सैन्य विमानों ने ब्रिटेन के विभिन्न हवाई अड्डों पर लैंडिंग की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले कुछ दिनों में ईरान, ग्रीनलैंड (Greenland) कोलंबिया और नाइजीरिया समेत कई देशों को दी गई कार्रवाई की धमकी के बीच इन विमानों की तैनाती ने वैश्विक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
यूरोप में अमेरिकी सैन्य हलचल से बढ़ा वैश्विक तनाव
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कम से कम 14 सी-17 (सी-17) ग्लोबमास्टर-3 कार्गो विमानों के अलावा दो एसी-130जे घोस्ट राइडर गनशिप्स को ब्रिटेन (Britain) के रॉयल एयर फोर्स के फैयरफोर्ड, मिल्डेनहॉल और लेकनहेथ बेस पर उतारा गया है।
घातक गनशिप और भारी कार्गो विमानों की तैनाती
सी-17 विमान अपनी लंबी दूरी के एयरलिफ्ट मिशनों और भारी सैन्य साजो-सामान ढोने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं, जबकि घोस्ट राइडर गनशिप आधुनिक तोपों, बमों और मिसाइलों से लैस एक उड़ता हुआ किला माना जाता है।
ब्लैक हॉक और चिनूक हेलीकॉप्टर भी ब्रिटेन पहुंचे
हथियारों के अलावा, ब्रिटेन के विमान हैंगरों में पांच एमएच-60एम ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक एमएच-47जी चिनूक हेलीकॉप्टर भी देखे गए हैं। ये हेलीकॉप्टर आमतौर पर विशेष अभियानों और गुप्त मिशनों के दौरान रसद और कमांडो पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
हवाई रिफ्यूलिंग की तैयारी, लंबी दूरी के हमले के संकेत
मंगलवार को एक केसी-135आर स्ट्रैटोटैंकर रिफ्यूलिंग विमान भी मिल्डेनहॉल में उतरा है, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिकी वायुसेना किसी लंबी दूरी के हवाई हमले की योजना बना रही है, जिसमें विमानों को हवा में ही ईंधन भरने की आवश्यकता पड़ सकती है।
नाइट स्टॉकर्स रेजिमेंट से जुड़ रहा है मिशन का सुराग
इस सैन्य जमावड़े को लेकर आशंकाएं इसलिए भी प्रबल हैं क्योंकि इन विमानों में से कुछ ने जॉर्जिया के हंटर आर्मी एयरफील्ड से उड़ान भरी है। यह क्षेत्र अमेरिकी सेना की विशिष्ट रेजिमेंट ‘नाइट स्टॉकर्स’ का केंद्र है, जिसने हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के मिशन में मुख्य भूमिका निभाई थी।
ब्रिटेन ने साधी चुप्पी, कूटनीतिक हलकों में बढ़ी बेचैनी
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने इस रहस्यमयी तैनाती पर सीधा जवाब देने से बचते हुए केवल इतना कहा है कि वे अन्य देशों की ऑपरेशनल गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं करते। हालांकि, मंत्रालय ने स्वीकार किया कि अमेरिका उनका प्रमुख रक्षा साझेदार है और दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहता है।
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वेनेजुएला के बाद अगला निशाना कौन?
दुनिया भर के कूटनीतिज्ञ अब इस बात को लेकर सशंकित हैं कि वेनेजुएला के बाद अमेरिका का अगला निशाना कौन सा देश होने वाला है।
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