24 से 26 जनवरी तक एसएसडी टोकन रद्द
तिरुमला। वार्षिक ‘राधासप्तमी – सूर्य जयंती’ महोत्सव (festival) में अब मात्र 15 दिन शेष रहते हुए, टीटीडी के अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी सी.एच. वेंकैया चौधरी ने 25 जनवरी को आयोजित होने वाले इस भव्य धार्मिक आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। यह समीक्षा बैठक तिरुमला स्थित पद्मावती रेस्ट हाउस में आयोजित की गई। इस बैठक में टीटीडी के संयुक्त कार्यकारी अधिकारी वीरब्रह्मम, मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी (सीवीएसओ) मुरली कृष्णा तथा तिरुमला (Tirumala) के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण ने भाग लिया। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, पार्किंग और आपातकालीन तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया।
व्यवस्थाएं करने के निर्देश
अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी ने अधिकारियों को सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने, विस्तृत बंदोबस्त योजनाएं तैयार करने और वाहन सेवाओं (वाहन सेवा) का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अन्नप्रसादम, स्वच्छता, चिकित्सा सेवाएं, श्रीवारी सेवक, प्रकाश व्यवस्था, एसवीबीसी कवरेज और प्रचार-प्रसार से संबंधित व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। उन्होंने सतर्कता एवं सुरक्षा तथा पुलिस विभागों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने, श्रद्धालुओं की संभावित संख्या का पूर्वानुमान लगाने और उसी के अनुरूप व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए।
सोशल मीडिया आउटरीच से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल रहीं
यातायात नियंत्रण, पार्किंग प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया दल और घाट सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को प्राथमिकता वाले क्षेत्र बताया गया। समीक्षा में इंजीनियरिंग, अन्नप्रसादम, स्वच्छता, श्रीवारी सेवक, चिकित्सा सेवाएं, प्रकाश एवं एलईडी स्क्रीन, पुष्प सज्जा, सांस्कृतिक दल, एसवीबीसी कवरेज, प्रचार और सोशल मीडिया आउटरीच से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल रहीं। अधिकारियों के अनुसार, 24 से 26 जनवरी तक एसएसडी टोकन जारी नहीं किए जाएंगे। महोत्सव अवधि के दौरान अर्जित सेवाएं, विशेषाधिकार दर्शन और वीआईपी ब्रेक दर्शन (प्रोटोकॉल गणमान्य व्यक्तियों को छोड़कर) रद्द रहेंगे।
राधा अष्टमी को क्या मनाया जाता है?
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीराधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन राधा-कृष्ण के प्रेम, भक्ति और माधुर्य भाव का स्मरण किया जाता है। भक्त व्रत रखते हैं, कीर्तन-भजन होते हैं और मंदिरों में विशेष पूजन किया जाता है। वैष्णव परंपरा में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है।
राधा अष्टमी का मेला कहां लगता है?
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित बरसाना में इस अवसर पर प्रसिद्ध मेला लगता है। बरसाना को श्रीराधा रानी की जन्मभूमि माना जाता है। यहां लाडलीजी मंदिर में विशेष आयोजन, झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन और उत्सव में भाग लेने आते हैं।
कृष्ण अष्टमी क्यों मनाई जाती है?
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था। इस दिन अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना का संदेश दिया जाता है। भक्त उपवास रखते हैं, रात को जन्मोत्सव मनाया जाता है और मंदिरों में विशेष पूजा होती है।
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