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Meeting : एसएलबीसी सुरंग कार्य फिर से शुरू करने की तैयारी- उत्तम

Ajay Kumar Shukla
Ajay Kumar Shukla
Meeting : एसएलबीसी सुरंग कार्य फिर से शुरू करने की तैयारी- उत्तम

मंत्री का निर्देश, कार्य दोनों सिरों से एक साथ किया जाए

हैदराबाद। एक महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना को पुनर्जीवित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए, सिंचाई एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी (N. Uttam Kumar Reddy) ने श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (SLBC) सुरंग के कार्यों को फिर से शुरू करने की घोषणा की। रविवार को सचिवालय स्थित अपने कक्ष में सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने कहा कि 22 फरवरी 2025 को सुरंग की छत गिरने के बाद परियोजना का कार्य रुक गया था, जिसे अब उन्नत सुरंग निर्माण पद्धतियों के साथ फिर से शुरू किया जाएगा।

एसएलबीसी सुरंग सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

मंत्री ने स्पष्ट किया कि 1983 में शुरू की गई अलीमिनेती माधव रेड्डी परियोजना (एएमआरपी) का प्रमुख घटक एसएलबीसी सुरंग सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। लगभग 44 किलोमीटर लंबी यह सुरंग केवल दो सिरों श्रीशैलम इनलेट और देवकोंडा आउटलेट से ही बनाई जा रही है और पूरी होने पर यह बिना मध्यवर्ती शाफ्ट के निर्मित होने वाली दुनिया की सबसे लंबी सुरंग होगी। यह सुरंग श्रीशैलम जलाशय के बाएं तट से निकलती है और इसका उद्देश्य तेलंगाना के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में 3 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करना तथा फ्लोराइड प्रभावित गांवों को पेयजल उपलब्ध कराना है। अब तक इनलेट साइड से 13.94 किमी और आउटलेट साइड से 20.4 किमी खुदाई पूरी हो चुकी है। लगभग 9.8 किमी कार्य अभी शेष है।

पुनः कार्य शुरू करने के लिए तैयार

उन्होंने बताया कि टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का मलबा हटा दिया गया है और स्थल को पूरी तरह साफ कर पुनः कार्य शुरू करने के लिए तैयार कर लिया गया है। भूवैज्ञानिक चुनौतियों को देखते हुए टीबीएम को छोड़कर उन्नत सुरंग निर्माण तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए हेलीकॉप्टर आधारित वीटीईएम प्लस मैग्नेटिक भू-भौतिकीय सर्वेक्षण के बाद लिया गया। मंत्री ने कहा कि इस हवाई सर्वेक्षण से चट्टानों की स्थिति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली है, जिससे कमजोर चट्टान क्षेत्रों के लिए अग्रिम चेतावनी प्रणाली स्थापित की जा सकेगी। इसके अलावा 3डी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने की योजना है ताकि भूवैज्ञानिक पूर्वानुमानों के आधार पर सुरंग के सहायक ढांचे तैयार किए जा सकें। ठेकेदार के रूप में जेपी इंफ्रा कार्य जारी रखेगा।

बैंक और कानूनी अनुमोदन हो चुके हैं प्राप्त

परियोजना निधियों की सुरक्षा के लिए एक एस्क्रो खाता स्थापित किया गया है, जिसके लिए बैंक और कानूनी अनुमोदन प्राप्त हो चुके हैं। इससे परियोजना-विशेष धनराशि सुरक्षित रहेगी और कार्य बिना बाधा आगे बढ़ सकेगा। मंत्री ने प्रधान सचिव राहुल बोज्जा और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित भुगतानों का शीघ्र निपटान किया जाए ताकि कार्य में देरी न हो। उन्होंने कहा कि आवश्यक होने पर अन्य परियोजनाओं से उपकरण और श्रमिकों को स्थानांतरित किया जाए। काम चौबीसों घंटे तीन शिफ्टों में चलेगा ताकि प्रगति तेज हो सके। संबंधित अधिकारियों को स्थल पर ही मौजूद रहकर डिजाइन, सुरक्षा और अन्य मुद्दों पर त्वरित निर्णय लेने चाहिए।

एसएलबीसी सुरंग परियोजना क्या है?

तेलंगाना राज्य में सिंचाई और पेयजल जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक महत्वपूर्ण जल परियोजना को एसएलबीसी सुरंग परियोजना कहा जाता है। इसका पूरा नाम श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल परियोजना है। इसके माध्यम से श्रीशैलम जलाशय से पानी को सुरंगों द्वारा नलगोंडा और आसपास के सूखाग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है, ताकि कृषि और पीने के पानी की समस्या को कम किया जा सके।

एसएलबीसी सुरंग क्या है?

श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल से जुड़ी यह एक लंबी भूमिगत सुरंग है, जिसे पहाड़ों के नीचे बनाया गया है। इसका उद्देश्य ऊंचाई वाले और जल संकटग्रस्त इलाकों तक पानी पहुंचाना है। सुरंग निर्माण में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। यह परियोजना तेलंगाना की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में गिनी जाती है और राज्य की जल सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है।

आने वाली सुरंग परियोजनाएं 2025 क्या हैं?

देश के विभिन्न राज्यों में वर्ष 2025 तक कई नई सुरंग परियोजनाएं प्रस्तावित और निर्माणाधीन हैं। इनमें सड़क, रेलवे, मेट्रो और जल परियोजनाओं से जुड़ी सुरंगें शामिल हैं। हिमालयी राज्यों में सड़क और रेल सुरंगों, महानगरों में मेट्रो सुरंगों और दक्षिण भारत में सिंचाई सुरंग परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन परियोजनाओं का लक्ष्य यातायात, जल आपूर्ति और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

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