ट्रम्प के टैरिफ रहेंगे या लौटेंगे अरबों डॉलर?
वाशिंगटन: इस पूरे मामले की जड़ 1977 का IEEPA कानून(Supreme Court) है। ट्रम्प ने दावा किया है कि व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) है, इसलिए वे कांग्रेस की मंजूरी के बिना टैरिफ लगा सकते हैं। हालांकि, निचली अदालतें पहले ही इसे ‘अवैध’ करार दे चुकी हैं। जजों का तर्क है कि ‘टैरिफ’ असल में एक ‘टैक्स’ है, और अमेरिकी संविधान के अनुसार टैक्स लगाने की शक्ति केवल संसद (कांग्रेस) के पास है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या ट्रम्प ने अपनी शक्तियों का उल्लंघन किया है।
हारने पर ट्रम्प और अमेरिका को होगा भारी वित्तीय नुकसान
यदि सुप्रीम कोर्ट ट्रम्प के खिलाफ फैसला सुनाता है, तो यह उनके दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी कानूनी हार होगी। विशेषज्ञों(Experts) के अनुसार, अमेरिकी सरकार(Supreme Court) को उन कंपनियों को 150 अरब डॉलर से ज्यादा (लगभग ₹12 लाख करोड़) वापस करने पड़ सकते हैं जिन्होंने अब तक यह टैरिफ चुकाया है। ट्रम्प ने खुद चेतावनी दी है कि इससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर ‘विनाशकारी’ प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, उनके प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर वे हारते हैं, तो वे दूसरे कानूनों (जैसे सेक्शन 232) के जरिए दोबारा टैरिफ लगाने की कोशिश करेंगे।
अन्य पढ़े: ट्रंप को ईरान पर सख्ती करवाने वाला इरफान सुल्तानी
भारत के लिए क्या है दांव पर? (50% टैरिफ का गणित)
भारत इस फैसले का सबसे बड़ा लाभार्थी हो सकता है। फिलहाल, भारतीय सामानों (Supreme Court)पर अमेरिका में कुल 50% टैरिफ लग रहा है। इसमें से 25% टैरिफ तो रूस से कच्चा तेल खरीदने की ‘पेनल्टी’ के रूप में लगाया गया है। इस भारी टैक्स के कारण भारत के कपड़ा, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट्स को भारी नुकसान हुआ है। अगर कोर्ट इन टैरिफ को अवैध मानता है, तो भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी और शेयर बाजार में तेजी आने की उम्मीद है।
अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रम्प के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो भारत पर क्या असर होगा?
यदि फैसला ट्रम्प के पक्ष में आता है, तो भारतीय सामानों पर 50% तक का टैरिफ जारी रहेगा। इसके अलावा, ट्रम्प सरकार(Supreme Court) उन देशों पर 500% तक का टैरिफ लगाने का नया कानून ला सकती है जो रूसी तेल खरीदना जारी रखते हैं। इससे भारत का अमेरिका को होने वाला निर्यात (जो सालाना करीब $87 बिलियन है) बुरी तरह प्रभावित हो सकता है और वैश्विक स्तर पर ‘ट्रेड वॉर’ बढ़ सकता है।
IEEPA कानून क्या है और ट्रम्प इसका बचाव कैसे कर रहे हैं?
International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) 1977 का एक कानून है जो राष्ट्रपति को ‘असाधारण खतरों’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार को रेगुलेट करने की शक्ति देता है। ट्रम्प का तर्क है कि भारी व्यापार घाटा और रूस से तेल खरीदकर उसे फंडिंग करना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। उनका मानना है कि टैरिफ से मिला ₹600 अरब डॉलर का राजस्व अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।
अन्य पढ़े: