विजयवाड़ा। पोलावरम बहुउद्देश्यीय परियोजना (Polavaram Multipurpose Project) के निर्माण कार्यों और मिट्टी स्थिरीकरण (Soil stabilization) कार्यों की समीक्षा के लिए विदेशी विशेषज्ञों की टीम ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी परियोजना स्थल का दौरा किया। इस दल में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ सीन हिंचबर्गर, डेविड बी. पॉल और जियानफ्रैंको डी सिको शामिल थे। उनके साथ केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। दूसरे दिन के निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने मुख्य बांध के गैप-1 क्षेत्र में चल रहे मिट्टी स्थिरीकरण कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने पहले से संकुचित मिट्टी को खोदकर उसकी मजबूती और स्थिरता का परीक्षण किया तथा गड्ढों में स्वयं उतरकर मिट्टी के संघनन स्तर का आकलन किया। एक अन्य स्थान पर बांध तटबंध के लिए डाली जा रही मिट्टी और उसे मजबूत बनाने की तकनीकों का अवलोकन किया गया।
विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए प्रश्नों और टिप्पणियों पर दिए गए स्पष्टीकरण
भारी रोलरों से मिट्टी को दबाने के बाद प्राप्त संपीड़न स्तर की भी बारीकी से जांच की गई। इससे पहले विदेशी विशेषज्ञों ने केंद्रीय और राज्य जल संसाधन विभागों के अधिकारियों तथा निर्माण एजेंसी मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में पहले दिन के निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए प्रश्नों और टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण दिए गए। गैप-2 के डिजाइन और संरचना पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। राज्य जल संसाधन विभाग के सलाहकार एम. वेंकटेश्वर राव, इंजीनियर-इन-चीफ के. नरसिंह मूर्ति, पोलावरम परियोजना के अधीक्षण अभियंता आर. रामचंद्र राव, एमईआईएल के जनरल मैनेजर ए. गंगाधर, डिप्टी जनरल मैनेजर मुरली पम्मी सहित अन्य अधिकारियों ने विदेशी विशेषज्ञों और केंद्रीय अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी।

आंकड़ों के आधार पर समीक्षा कर अपने संदेहों का किया समाधान
विशेषज्ञ दल ने इन प्रस्तुतियों के साथ-साथ स्थल निरीक्षण के दौरान एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर समीक्षा कर अपने संदेहों का समाधान किया। निरीक्षण दल में केंद्रीय अधिकारी सरबजीत सिंह बख्शी, मनीष राठौड़, गौरव तिवारी और हेमंत गौतम; सीएसएमआरएस के मनीष गुप्ता और रवि अग्रवाल; सीडब्ल्यूपीआरएस के वी.एस. रामाराव; पोलावरम परियोजना प्राधिकरण के सदस्य-सचिव एम. रघुराम; निदेशक के. शंकर तथा एनआईआरएम निदेशक अजय कुमार नैतानी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
विजयवाड़ा क्यों प्रसिद्ध है?
आंध्र प्रदेश का यह प्रमुख शहर धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारणों से जाना जाता है। कनक दुर्गा मंदिर, कृष्णा नदी, व्यापारिक केंद्र, शिक्षा संस्थान और परिवहन हब के रूप में इसकी पहचान है। दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण शहरों में इसकी गिनती होती है।
विजयवाड़ा का दूसरा नाम क्या है?
स्थानीय परंपरा के अनुसार इसे बेजवाड़ा नाम से भी जाना जाता है। प्राचीन समय में यही नाम प्रचलित था, जो बाद में बदलकर विजयवाड़ा हुआ। ऐतिहासिक ग्रंथों और जनश्रुतियों में बेजवाड़ा नाम का उल्लेख मिलता है।
विजयवाड़ा में कौन सी भाषा बोली जाती है?
मुख्य रूप से यहां तेलुगु भाषा का प्रयोग होता है। इसके अलावा हिंदी और अंग्रेज़ी भी आमतौर पर समझी और बोली जाती हैं। व्यापार, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में बहुभाषी वातावरण देखने को मिलता है।
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