वॉशिंगटन। पाकिस्तान ने अमेरिका की जमकर चरण वंदना की और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार की मांग तक कर डाली। लेकिन अब उसी अमेरिका ने पाकिस्तान को बड़ा और करारा झटका दिया है।
अमेरिका-भारत ट्रेड डील के साथ जारी हुआ विवादित नक्शा
अमेरिका और भारत के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील (व्यापार समझौते) के फ्रेमवर्क के साथ एक ऐसा नक्शा जारी किया गया है, जिसने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (USTR) कार्यालय द्वारा जारी इस आधिकारिक नक्शे में पूरे जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) भी शामिल है, को भारत के अभिन्न अंग के रूप में दिखाया गया है।
कूटनीतिक रूप से अहम कदम
यह कदम न केवल कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि यह इस बात पर भी मुहर लगाता है कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में भारत के क्षेत्रीय संप्रभुता के दावे को खुला समर्थन दे रहा है।

व्यापार समझौते की जानकारी के साथ साझा की गई पोस्ट
दरअसल, यूएसटीआर ने भारत-अमेरिका (India-America) के बीच नए अंतरिम व्यापार समझौते की जानकारी देते हुए एक पोस्ट साझा किया था। इस पोस्ट का उद्देश्य अमेरिकी कृषि उत्पादों जैसे ट्री नट्स, लाल ज्वार और ताजे फलों के लिए भारत में नए बाजार खुलने की उपलब्धि को उजागर करना था।
नक्शे ने खींचा दुनिया का ध्यान
हालांकि, इस पोस्ट के साथ संलग्न नक्शे ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस नक्शे में न तो लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) दिखाई गई और न ही किसी क्षेत्र को विवादित बताया गया। साफ तौर पर पूरा जम्मू-कश्मीर भारत के मानचित्र के भीतर दर्शाया गया है।
भारत का पुराना और स्पष्ट रुख
भारत का हमेशा से यह अडिग रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके भारत का अभिन्न हिस्सा हैं, जिन पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है। अब अमेरिका जैसे वैश्विक प्रभावशाली देश के आधिकारिक विभाग से ऐसा नक्शा जारी होना एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
पाकिस्तान के नेतृत्व के लिए बड़ा झटका
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के लिए एक बड़ा झटका है। पाकिस्तान दशकों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को उठाता रहा है, लेकिन अब उसके पुराने सहयोगी भी उसका साथ छोड़ते नजर आ रहे हैं।
महज ग्राफिकल गलती नहीं : विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह नक्शा महज एक ग्राफिकल त्रुटि नहीं बल्कि एक सोचा-समझा कूटनीतिक संकेत है। भारत और अमेरिका के बीच गहराते रक्षा और व्यापारिक संबंधों के बीच यह कदम भारत के प्रति अमेरिका के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
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भारत की स्थिति और मजबूत
विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश साफ है कि अमेरिका अब भारत के साथ न केवल व्यापार और टैरिफ जैसे मुद्दों पर, बल्कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता के सवाल पर भी मजबूती से खड़ा है। यह समर्थन भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति और मजबूत करेगा, जबकि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा रणनीतिक नुकसान साबित हो रहा है।
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