नेट NPA में आई भारी गिरावट
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(SBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) में शानदार नतीजे पेश किए हैं। बैंक का कंसॉलिडेटेड मुनाफा(Profit) सालाना आधार पर 14% बढ़कर ₹21,876 करोड़ हो गया है। बैंक की कुल आय में भी 11% की वृद्धि देखी गई है, जो अब ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुंच गई है। ब्याज से होने वाली कमाई में भी 5% का उछाल आया है, जो बैंक की मजबूत ऋण देने की क्षमता और बाजार में इसकी पकड़ को साबित करता है।
सम्पत्ति की गुणवत्ता में सुधार: NPA में 16% की कमी
बैंक के लिए सबसे राहत की बात उसकी संपत्ति की गुणवत्ता(SBI) में सुधार है। तीसरी तिमाही के दौरान SBI का नेट NPA (गैर-निष्पादित संपत्ति) 16% गिरकर ₹18,012 करोड़ रह गया है। पिछले साल यह आंकड़ा ₹21,377 करोड़ था। NPA में कमी का मतलब है कि बैंक अपने द्वारा दिए गए कर्जों की वसूली बेहतर तरीके से कर पा रहा है और डूबते हुए कर्ज के बोझ को कम करने में सफल रहा है। इससे बैंक की बैलेंस शीट पहले से अधिक सुरक्षित और मजबूत हुई है।
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निवेशकों की चांदी: एक साल में 45% का रिटर्न
SBI के बेहतर प्रदर्शन का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिख रहा है। बैंक के शेयर ने पिछले एक साल में अपने निवेशकों को करीब 45% का तगड़ा रिटर्न(SBI) दिया है। केवल पिछले छह महीनों में ही शेयर की कीमत में 32% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। ₹9.84 लाख करोड़ के मार्केट कैप के साथ SBI देश का सबसे बड़ा सरकारी लेंडर बना हुआ है। 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों और वैश्विक स्तर पर 241 शाखाओं के साथ बैंक न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूती बनाए हुए है।
स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड मुनाफे में क्या अंतर होता है?
स्टैंडअलोन रिपोर्ट में केवल मुख्य कंपनी या एक विशिष्ट यूनिट(SBI) का वित्तीय लेखा-जोखा दिखाया जाता है। वहीं, कंसॉलिडेटेड रिपोर्ट में मुख्य कंपनी के साथ-साथ उसकी सभी सहायक कंपनियों के प्रदर्शन को जोड़कर पूरी तस्वीर पेश की जाती है।
बैंक के लिए NPA का कम होना क्यों महत्वपूर्ण है?
NPA वह कर्ज होता है जिसकी किस्त 90 दिनों से नहीं चुकाई गई हो। इसका कम होना यह दर्शाता है कि बैंक का रिस्क मैनेजमेंट बेहतर है और उसे घाटा कम हो रहा है। कम NPA बैंक की विश्वसनीयता और लाभ कमाने की क्षमता को बढ़ाता है।
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