तिरुपति। श्री कल्याण वेंकटेश्वरस्वामी (Sri Kalyan Venkateswara Swamy) ने श्रीदेवी और भूदेवी के साथ पेड्डा शेष वाहन पर वैकुंट नारायण अलंकरण में प्रथम दिन के वार्षिक ब्रह्मोत्सवम् में श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया। यह भव्य आयोजन श्रीनिवास मंगापुरम (Srinivas Mangapuram) में रविवार शाम को सम्पन्न हुआ। इस वाहन यात्रा को मंदिर की चारों माडा गलियों में संगीत, भक्ति मंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ निकाला गया, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं में श्रद्धा और आनंद का अद्भुत वातावरण बना। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के संयुक्त कार्यकारी अधिकारी श्री वीरब्रह्मम, मंदिर अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस भव्य वाहन सेवा में शामिल हुए।

भगवान वेंकटेश्वर की कहानी क्या है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान वेंकटेश्वर, भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने कलियुग में मानव कल्याण के लिए तिरुमला की सात पहाड़ियों पर निवास किया। कथा है कि देवी लक्ष्मी से विरह के बाद भगवान ने यह स्थान चुना। ऋषि और देवताओं की प्रार्थना पर उन्होंने मानव रूप में प्रकट होकर भक्तों को मोक्ष और आशीर्वाद देने का वचन दिया।
वेंकटेश्वर स्वामी इतना प्रसिद्ध क्यों है?
धार्मिक दृष्टि से वेंकटेश्वर स्वामी को कलियुग का प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। तिरुमला मंदिर विश्व के सबसे अधिक दर्शन किए जाने वाले मंदिरों में से एक है। भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की आस्था, चढ़ावे की परंपरा और सदियों पुरानी भक्ति परंपरा ने इस मंदिर को अत्यंत प्रसिद्ध बना दिया है। यहां हर वर्ग और क्षेत्र के श्रद्धालु आते हैं।
भगवान वेंकटेश्वर की आंखें क्यों बंद हैं?
आस्था के अनुसार भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति की आंखें आधी बंद दिखाई देती हैं, जिसे योग निद्रा की अवस्था माना जाता है। कहा जाता है कि उनकी दृष्टि अत्यंत तेज है, जिससे संसार को क्षति हो सकती है। इसलिए पुजारी भी दर्शन के समय कपूर जलाकर भगवान की दृष्टि को शांत करते हैं। यह मान्यता भक्तों के बीच गहरी श्रद्धा का विषय है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :