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Sports- तिलक हालात के अनुसार खेलने वाले बल्लेबाज़ हैं- सुनील गावस्कर

Anuj Kumar
Anuj Kumar
Sports- तिलक हालात के अनुसार खेलने वाले बल्लेबाज़ हैं- सुनील गावस्कर

मुम्बई । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर (Sunil Gawaskar) ने टी20 विश्वकप के पहले ही मैच में तिलक वर्मा की बल्लेबाजी की जमकर सराहना की है। गावस्कर ने कहा कि तिलक एक समझदार क्रिकेटर हैं, जो हालात के अनुसार खेलना जानते हैं और दबाव में भी संयम बनाए रखते हैं।

दबाव में परिपक्वता से खेलते हैं तिलक

गावस्कर को उम्मीद है कि 12 फरवरी को नामीबिया (Namibia) के खिलाफ होने वाले मुकाबले में भी तिलक वर्मा इसी तरह जिम्मेदारी भरी पारी खेलेंगे। उन्होंने दबाव के क्षणों में परिपक्वता दिखाने के लिए तिलक की खास तौर पर तारीफ की।

कब और कैसे खेलना है, अच्छी तरह जानते हैं

गावस्कर ने कहा, “तिलक एक बहुत ही होशियार क्रिकेटर (Cricketers) हैं। वह सिर्फ अपनी बल्लेबाजी तकनीक या शॉट्स के लिए ही नहीं, बल्कि इस समझ के लिए भी जाने जाते हैं कि कब और कैसे खेलना है।” उन्होंने बताया कि तिलक दूसरे ओवर में ऐसे समय बल्लेबाजी करने आए, जब टीम के मुख्य आक्रामक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा आउट हो चुके थे।

बिना जोखिम जवाबी हमला

पूर्व कप्तान के मुताबिक उस वक्त तिलक जानते थे कि टीम को जवाबी हमला चाहिए, लेकिन बिना अनावश्यक जोखिम उठाए। उन्होंने कहा, “वह जरूरत से ज्यादा आक्रामक नहीं हो रहे थे, बल्कि सोच-समझकर खेल रहे थे।”

स्मार्ट शॉट चयन से दिखाई समझदारी

गावस्कर ने उदाहरण देते हुए कहा कि तिलक ने मिड-ऑन के ऊपर से चिप शॉट खेला, क्योंकि उन्हें पता था कि फील्डर सर्कल के अंदर है। “वह छक्का मारने की कोशिश नहीं कर रहे थे, सिर्फ चौका लेने पर फोकस था,” उन्होंने कहा।

टीम के लिए टिककर खेलने वाले बल्लेबाज

गावस्कर के अनुसार तिलक उस तरह के खिलाड़ी हैं जो पारी को संभालकर आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि यह बात एशिया कप फाइनल में भी देखने को मिली थी, जहां तिलक ने समय लिया और अंत में टीम को जीत दिलाई।

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लंबी पारी से बड़े स्कोर की उम्मीद

उन्होंने कहा, “अगर तिलक जैसा खिलाड़ी पावरप्ले में आता है और 14वें या 15वें ओवर तक क्रीज पर बना रहता है, तो टीम आसानी से एक मजबूत स्कोर खड़ा कर सकती है।”

क्या सचिन और गावस्कर एक साथ खेले थे?

सचिन ने 1989 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रवेश किया, जबकि गावस्कर ने 1987 में संन्यास ले लिया। घरेलू स्तर पर भी, मुंबई के लिए खेलने के बावजूद दोनों कभी एक साथ नहीं खेले । गावस्कर ने उसी साल संन्यास लिया जिस साल सचिन ने क्रिकेट में प्रवेश किया, इसलिए वे एक-दूसरे के मिलन से बाल-बाल बच गए।

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