Kashi Vishwanath Temple: देश के हर कोने से शिव भक्त काशी भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं. काशी को मोक्ष प्रदान करने वाली नगरी भी कहा जाता है, लेकिन क्या जानते हैं कि देवों के देव महादेव को बाबा विश्वनाथ क्यों कहा जाता है? आइए इस बारे में जानते हैं. साथ ही जानते हैं इस मंदिर का इतिहास।
Kashi Vishwanath Temple History: वारणसी को मंदिरों का शहर कहा जाता है. इसे काशी भी कहा जाता है. काशी भगवान भोलेनाथ की नगरी मानी जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, काशी नगरी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है. काशी में भगवान के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग है. यहां भगवान महादेव बाबा विश्वनाथ के रूप के रूप में स्थापित हैं. काशी विश्वनाथ मंदिर की प्रसिद्धि देश ही नहीं दुनिया भर में है।
देश के हर कोने से शिव भक्त काशी (Kashi) भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं. इतना नहीं विदेशों से भी बहुत लोग काशी दर्शन करने आते हैं. काशी को मोक्ष प्रदान करने वाली नगरी भी कहा जाता है. मान्यता है कि यहां मृतकों को भगवान शिव स्वयं मोक्ष प्रदान करते हैं और शिव धाम में स्थान देते हैं, लेकिन क्या जानते हैं कि देवों के देव महादेव को बाबा विश्वनाथ क्यों कहा जाता है? आइए इस बारे में जानते हैं. साथ ही जानते हैं इस मंदिर का इतिहास।
महादेव को क्यों कहा जाता है बाबा विश्वनाथ?
काशी विश्वनाथ मंदिर देवों के देव महादेव (Lord Mahadev) को समर्पित किया गया है. भगवान शिव को विश्वनाथ या विश्वेश्वर भी कहा जाता है. इसका मतलब ये है कि देवों के देव महादेव ब्रह्मांड के शासक हैं. वहीं, यह मंदिर काशी में है. इस कारण इसे काशी विश्वनाथ मंदिर के रूप में जाना जाता है. सनातन शास्त्रों में काशी का विस्तारपूर्वक वर्णन मिलता है. इस मंदिर में बाबा विश्वनाथ की पांच समय आरती होती है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त गंगा में स्नान करके बाबा विश्वनाथ के दर्शन करता है उसके जन्म-जन्म के पाप कट जाते हैं. साथ ही महादेव की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं और सभी संकटों से मुक्ति मिलती है।
काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार, वर्तमान समय यानी अभी जो काशी विश्वनाथ मंदिर का स्वरूप है उसका निर्माण साल 1780 में कराया गया था. काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने कराया था. वहीं, काशी विश्वनाथ मंदिर के दो गुंबदों को महाराजा रणजीत सिंह ने सोने से कवर कराया था. महादेव की नगरी स्थित विश्वनाथ शिवलिंग का इतिहास सदियों पुराना बताया जाता है।
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