एपस्टीन फाइलों में दावे निकले झूठे
बीजिंग: चीनी सरकारी मीडिया ने बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा(Dalai Lama) की वैश्विक प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए जेफ्री एपस्टीन केस की फाइलों का सहारा लिया। चीन ने इन फाइलों के तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और यह नैरेटिव(Narrative) बनाने की कोशिश की कि दलाई लामा के संबंध अमेरिका के कुख्यात अपराधी एपस्टीन से थे। इस डिजिटल प्रोपेगेंडा का मुख्य उद्देश्य तिब्बती आंदोलन के आध्यात्मिक नेतृत्व पर सवाल उठाना था।
जांच का निष्कर्ष: 35 लाख पन्नों की पड़ताल
केंद्रीय तिब्बती(Tibetan) प्रशासन और स्वतंत्र जांचकर्ताओं ने अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा जारी 35 लाख पन्नों की ‘एपस्टीन फाइलों’ का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया। जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि दलाई लामा(Dalai Lama) और एपस्टीन के बीच कभी कोई मुलाकात नहीं हुई। फाइलों में उनका नाम केवल संदर्भ के तौर पर आया था, जो किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष संलिप्तता या वित्तीय लेन-देन को साबित नहीं करता है।
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दलाई लामा कार्यालय की आधिकारिक सफाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए दलाई लामा(Dalai Lama) के कार्यालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। बयान में स्पष्ट किया गया कि परम पावन दलाई लामा ने अपने जीवन में कभी भी जेफ्री एपस्टीन से मुलाकात नहीं की और न ही उनके कार्यालय की ओर से किसी को संपर्क करने की अनुमति दी गई। यह स्पष्टीकरण उन सभी अफवाहों पर विराम लगाता है जो डिजिटल माध्यमों से फैलाई जा रही थीं।
चीनी मीडिया ने दलाई लामा का नाम एपस्टीन केस से क्यों जोड़ना चाहा?
चीन लंबे समय से दलाई लामा(Dalai Lama) की छवि को वैश्विक स्तर पर खराब करने की कोशिश करता रहा है। एपस्टीन केस की फाइलों का गलत संदर्भ देकर चीन ने यह दिखाने की कोशिश की कि दलाई लामा की संलिप्तता अनैतिक गतिविधियों में है, ताकि तिब्बती मुद्दे की नैतिकता को कमजोर किया जा सके।
क्या एपस्टीन फाइलों में दलाई लामा के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत मिला?
जी नहीं। 35 लाख पन्नों की विस्तृत जांच के बाद भी दलाई लामा और जेफ्री एपस्टीन के बीच किसी भी प्रकार की बातचीत, मुलाकात या पैसों के लेन-देन का कोई भी सबूत नहीं मिला है। सभी दावे पूरी तरह से निराधार पाए गए।
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