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UP- यूपी चुनाव से पहले बंगला सियासत गरम, मायावती को बड़े बंगले पर सवाल

Anuj Kumar
Anuj Kumar
UP- यूपी चुनाव से पहले बंगला सियासत गरम, मायावती को बड़े बंगले पर सवाल

नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती (BSP Chief Mayawati) को दिल्ली में टाइप-8 श्रेणी का सरकारी बंगला आवंटित किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। आम तौर पर राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष को टाइप-6 या टाइप-7 श्रेणी का आवास मिलता है, ऐसे में उच्च श्रेणी का बंगला मिलने को सियासी संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है। यूपी चुनाव से पहले यह मामला “बंगला राजनीति” के तौर पर उभर आया है।

आकाश आनंद के बयान से शुरू हुई सियासी हलचल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटनाक्रम की जड़ें अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान दिखाई देती हैं। सीतापुर की एक रैली में मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला किया था। उन्होंने भाजपा को नफरत फैलाने वाली पार्टी तक कह दिया। इस बयान से नाराज होकर मायावती ने उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया और इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सार्वजनिक रूप से दी।

भाजपा पर नरमी, सपा पर तीखे तेवर

दिलचस्प बात यह रही कि आकाश आनंद (Akash Anand) समाजवादी पार्टी पर भी हमलावर थे, लेकिन इस पर मायावती ने सार्वजनिक नाराजगी नहीं जताई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे यह संकेत गया कि मौजूदा समय में मायावती भाजपा से सीधी टक्कर लेने से बचती नजर आ रही हैं, जबकि बसपा की मुख्य लड़ाई समाजवादी पार्टी से मानी जा रही है।

सीएम योगी का सार्वजनिक आभार

इसके बाद 9 अक्टूबर 2025 को एक रैली के दौरान मायावती ने भाजपा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सार्वजनिक रूप से आभार जताया। इस बयान ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दी और बसपा-भाजपा के रिश्तों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।

टाइप-8 बंगला और बढ़ी चर्चाएं

जनवरी 2026 में दिल्ली में टाइप-8 श्रेणी का बंगला आवंटित होने के बाद यह सवाल और गहरा गया कि क्या भाजपा और बसपा के बीच कोई रणनीतिक समझ बन रही है। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

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अखिलेश पर सीधा निशाना

हाल के बयानों में मायावती ने अखिलेश यादव को अपना “सबसे बड़ा राजनीतिक दुश्मन” बताया है। इससे साफ होता है कि बसपा की प्राथमिक सियासी जंग समाजवादी पार्टी से है। हालांकि, भाजपा और बसपा के बीच किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बदलते घटनाक्रमों ने यूपी की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अब देखना होगा कि ये नजदीकियां सिर्फ रणनीति हैं या आने वाले चुनाव में किसी बड़े सियासी समीकरण की भूमिका तैयार कर रही हैं।

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