बहन की खौफनाक ताकत या बेटी का नया दौर?
प्योंगयांग: दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसियों और विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर कोरिया(North Korea) में किम जोंग-उन के बाद सत्ता पर काबिज होने के लिए उनकी बहन किम यो-जुंग और 13 वर्षीय बेटी किम जू-ऐ के बीच संघर्ष छिड़ सकता है। किम जोंग पिछले कुछ समय से अपनी बेटी को मिसाइल परीक्षणों और सैन्य परेडों में साथ रखकर उसे उत्तराधिकारी के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों(Experts) का मानना है कि उनकी 38 वर्षीय छोटी बहन किम यो-जुंग की सेना और पार्टी पर इतनी मजबूत पकड़ है कि वे सत्ता पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।
खूंखार छवि: ‘सीक्रेट डायरी’ और मौत की सजा का अधिकार
किम यो-जुंग को उत्तर कोरिया की दूसरी सबसे ताकतवर शख्सियत माना जाता है। उन्हें किम जोंग की ‘सीक्रेट डायरी’ कहा जाता है क्योंकि वे देश-विदेश में तानाशाह की छवि बनाने और परमाणु समझौतों की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका(North Korea) निभाती हैं। वे प्रोपेगेंडा(Propaganda) विभाग की प्रमुख हैं और उनके पास इतनी शक्ति है कि वे राष्ट्रपति को छोड़कर पार्टी की केंद्रीय समिति के किसी भी सदस्य को मौत की सजा दे सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी क्रूरता और प्रशासनिक अनुभव उन्हें वर्तमान में सबसे बड़ा दावेदार बनाता है।
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भविष्य की अनिश्चितता: सेहत और विरासत का सवाल
42 वर्षीय किम जोंग-उन की खराब सेहत (मधुमेह और उच्च रक्तचाप) को देखते हुए उत्तराधिकार का सवाल गंभीर हो गया है। उत्तर कोरिया का इतिहास सत्ता के लिए खून-खराबे से भरा रहा है; किम जोंग ने खुद अपने चाचा और सौतेले भाई को रास्ते से हटा दिया था। यदि किम जोंग-उन लंबे समय(North Korea) तक शासन करते हैं, तो वे अपनी बेटी जू-ऐ को तैयार कर सकते हैं, लेकिन अचानक सत्ता खाली होने की स्थिति में अनुभव और संगठन पर पकड़ के कारण किम यो-जुंग का पलड़ा भारी नजर आता है।
किम यो-जुंग को किम जोंग-उन की ‘सीक्रेट डायरी’ क्यों कहा जाता है?
उसको ‘सीक्रेट डायरी’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे किम जोंग की सार्वजनिक छवि बनाने, उन्हें महत्वपूर्ण राजनीतिक सलाह देने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु शिखर(North Korea) सम्मेलनों की रणनीति तैयार करने में सबसे भरोसेमंद सहयोगी रही हैं।
किम जोंग-उन की बेटी किम जू-ऐ को उत्तराधिकारी मानने के क्या संकेत मिले हैं?
किम जोंग-उन अपनी 13 वर्षीय बेटी को लगातार मिसाइल परीक्षणों, सैन्य परेडों और बड़े सरकारी आयोजनों में अपने साथ रख रहे हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह उसे भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने का एक आधिकारिक संकेत है।
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