Indus water treaty : भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाले रावी नदी के पानी को रोककर अपने उपयोग में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सिंधु जल संधि के तहत भारत के हिस्से में आने वाला पानी अब पूरी तरह देश के भीतर उपयोग किया जाएगा। पंजाब–जम्मू कश्मीर सीमा पर बन रहा शाहपुरकंडी बैराज लगभग पूरा हो चुका है, जिसके बाद अतिरिक्त जल पाकिस्तान की ओर नहीं जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, सिंधु नदी प्रणाली पर अत्यधिक निर्भर पाकिस्तान को खासकर गर्मियों में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
1960 की सिंधु जल संधि के अनुसार रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर भारत का पूर्ण अधिकार है। भंडारण व्यवस्था की कमी के कारण अब तक अतिरिक्त जल पाकिस्तान की ओर बह जाता था। 31 मार्च 2026 तक परियोजना पूरी होने के बाद यह पानी जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों में लगभग 32 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए उपयोग किया जाएगा, जबकि पंजाब के हजारों हेक्टेयर क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।
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इस परियोजना से लगभग 206 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन के साथ (Indus water treaty) जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। अब तक व्यर्थ बहने वाला पानी किसानों और कृषि विकास के लिए उपयोगी बनेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और जल सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।
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