नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Zinping) के नेतृत्व में चीन की सेना परमाणु हथियारों के दम पर रणनीतिक बढ़त बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने एक बड़े सैन्य विस्तार की ओर इशारा किया है। इन तस्वीरों के मुताबिक, चीन भारत की सीमा के करीब परमाणु ढांचे को मजबूत कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
अरुणाचल सीमा के पास बढ़ी हलचल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) की सीमा से लगभग 800 किलोमीटर दूर चीन के सिचुआन प्रांत (Sichuan Province) में परमाणु क्षमताओं का विस्तार जारी है। सैटेलाइट तस्वीरों में ऐसे निर्माण कार्य दिखाई दिए हैं, जिन्हें रक्षा विशेषज्ञ रणनीतिक परमाणु ढांचे से जोड़कर देख रहे हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा?
तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि सिचुआन की पहाड़ियों और घाटियों में दो प्रमुख स्थानों पर गतिविधियां तेज हैं।
- जितोंग घाटी में नए बंकर और मजबूत पाइपलाइन नेटवर्क बनाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यहां हाई एक्सप्लोसिव टेस्टिंग से जुड़ी गतिविधियां हो सकती हैं।
- पिंगटोंग घाटी में प्लूटोनियम पिट्स से संबंधित निर्माण की आशंका जताई जा रही है। यह हिस्सा अत्यधिक सुरक्षा घेरे में है और किसी सैन्य किले जैसा प्रतीत होता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह विस्तार सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकता है। चीन पहले ही अरुणाचल प्रदेश को अपना “कोर इंटरेस्ट” बता चुका है। ऐसे में सीमा के नजदीक परमाणु ढांचे का विकास भारत के पूर्वोत्तर इलाकों के लिए सतर्कता का संकेत माना जा रहा है।
बढ़ता परमाणु जखीरा
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, 2026 की शुरुआत तक चीन के पास 600 से अधिक परमाणु वारहेड होने का अनुमान है, जो 2030 तक 1,000 के पार जा सकते हैं। यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों को लेकर नई प्रतिस्पर्धा की चर्चा है।
अन्य पढ़े: बांग्लादेश में BNP लहर, तारिक की डबल जीत!
भारत के लिए क्या मायने?
रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की बढ़ती परमाणु क्षमता भारत के लिए सुरक्षा समीकरणों को जटिल बना सकती है। हालांकि, भारत भी अपनी रक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने पर जोर दे रहा है। इन घटनाक्रमों ने एक बार फिर एशिया में शक्ति संतुलन और सीमा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
Read More :