बजट प्रस्तावों पर सचिवालय में समीक्षा बैठक आयोजित
हैदराबाद। राज्य के पशुपालन, दुग्ध उद्योग विकास, मत्स्य, युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के मंत्री वाकिटि श्रीहरि (Vakiti Srihari) ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तेलंगाना की आय के स्रोत बढ़ाने के लिए पशुपालन विभाग को सुदृढ़ और विकसित किया जाए। वर्ष 2026-2027 के लिए पशुपालन एवं दुग्ध उद्योग विकास से संबंधित बजट प्रस्तावों पर सचिवालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मंत्री वाकिटि श्रीहरि ने कहा कि नई सोच और नवीन योजनाओं के माध्यम से ही पशुपालन विभाग में अपेक्षित परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुग्ध उद्योग के समुचित विकास के बिना तेलंगाना का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल बजट में आवंटित राशि पर ध्यान न देकर यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निधियों का प्रभावी उपयोग हो। मंत्री ने निर्देश दिए कि बजट में अधिक धनराशि आवंटित (funds allocated) किए जाने के लिए विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किए जाएं।
राज्य में उपयुक्त योजनाएं लागू करने का दिया सुझाव
उन्होंने आर्थिक रूप से राज्य को सशक्त बनाने वाली योजनाएं तैयार करने पर बल दिया। पशुपालन विभाग के सुदृढ़ीकरण के लिए हरियाणा, तमिलनाडु और गुजरात राज्यों के आदर्श प्रारूपों का अध्ययन कर राज्य में उपयुक्त योजनाएं लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पशुपालन और दुग्ध उद्योग में सफलता के लिए कौन-कौन से उपाय कारगर हो सकते हैं, इसका गंभीर अध्ययन आवश्यक है। मंत्री ने कहा कि स्वस्थ तेलंगाना के निर्माण से ही उज्ज्वल भविष्य संभव है। इसके लिए शुद्ध दूध, उच्च पोषक तत्वों से युक्त कुक्कुट मांस, बकरी और भेड़ का मांस तथा मछली का उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से समन्वय और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश
दुग्ध क्षेत्र से संबंधित सभी आवश्यक पहलुओं को बजट में शामिल करने, दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। दुग्ध उद्योग के सुदृढ़ीकरण और बेहतर समन्वय के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा स्तर के अधिकारी की नियुक्ति का सुझाव भी मंत्री ने दिया, जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि संभव हो सके। उन्होंने पशु चिकित्सालयों में आधारभूत सुविधाओं के विकास और कर्मचारियों के कल्याण के लिए भी बजट में पर्याप्त प्रावधान करने को कहा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पशुओं के टीकाकरण और औषधि आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी बजट में समुचित प्रावधान करने के निर्देश दिए गए।
सशक्त रूप में पशुपालन विभाग को बढ़ाया जाए आगे
मंत्री ने कहा कि पूर्व की भांति नहीं, बल्कि अधिक सशक्त रूप में पशुपालन विभाग को आगे बढ़ाया जाए। समीक्षा बैठक में राज्य दुग्ध विकास निगम के अध्यक्ष गुत्ता अमित रेड्डी, पशुपालन, दुग्ध उद्योग एवं मत्स्य विभाग के सचिव सुरेंद्र मोहन, विभागीय निदेशक गोपी, दुग्ध विकास निगम के प्रबंध निदेशक चंद्रशेखर रेड्डी, पी. वी. नरसिंह राव पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानप्रकाश सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
पशुपालन के फॉर्म कब भरे जाएंगे?
आवेदन प्रक्रिया आमतौर पर वर्षभर अलग-अलग चरणों में चलती रहती है। केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर तिथियां घोषित करती हैं। कई बैंक पूरे साल ऋण आवेदन स्वीकार करते हैं, जबकि कुछ योजनाओं की अंतिम तिथि निर्धारित होती है। सही जानकारी के लिए जिला पशुपालन कार्यालय या नजदीकी बैंक शाखा से संपर्क करना बेहतर रहता है।
पशुपालन का लोन कैसे मिलता है?
ऋण प्राप्त करने के लिए आवेदक को आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक खाता विवरण और प्रस्तावित परियोजना की जानकारी जमा करनी होती है। आवेदन बैंक या संबंधित सरकारी योजना के तहत किया जाता है। दस्तावेजों की जांच और पात्रता सत्यापन के बाद स्वीकृति दी जाती है, फिर राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
क्या पशुपालन लोन योजना 2025 के लिए आवेदन शुरू हो गए हैं?
वर्ष 2025 में विभिन्न सरकारी योजनाओं और बैंकों के माध्यम से ऋण आवेदन की प्रक्रिया जारी है। कुछ योजनाएं निरंतर खुली रहती हैं, जबकि अन्य की समय सीमा तय होती है। नवीनतम स्थिति जानने के लिए आधिकारिक विभाग या बैंक से जानकारी लेना उचित और सुरक्षित तरीका माना जाता है।
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