तिरुमला, हैदराबाद। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् द्वारा तिरुमला (Tirumala) में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए संचालित निःशुल्क ‘श्रीवारी धर्म रथ’ बस सेवा को प्रमुख बस ठहरावों पर डिजिटल प्रदर्शन पट्टिकाएं लगाए जाने के बाद अत्यंत उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। इन डिजिटल पट्टिकाओं के माध्यम से बसों के आगमन का तात्कालिक समय प्रदर्शित हो रहा है, जिससे श्रद्धालुओं का प्रतीक्षा समय काफी कम हो गया है। देश के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में इस प्रकार की तकनीकी व्यवस्था पहली बार लागू की गई है, जिससे श्रद्धालु तिरुमला क्षेत्र में अपनी यात्रा की बेहतर योजना बना पा रहे हैं। अतिरिक्त कार्याधिकारी वेंकैया चौधरी (Venkaiah Chowdhary) की विशेष पहल पर तिरुमला के 20 बस ठहरावों पर डिजिटल प्रदर्शन पट्टिकाएं स्थापित की गई हैं। वर्तमान में इस सेवा के अंतर्गत 12 आधुनिक विद्युत बसें संचालित हो रही हैं।
300 फेरे लगाए जा रहे हैं प्रतिदिन
प्रतिदिन औसतन लगभग 300 फेरे लगाए जा रहे हैं और प्रत्येक फेरा लगभग साढ़े छह किलोमीटर की दूरी तय करता है। इस पहल के बाद निजी टैक्सियों के उपयोग में उल्लेखनीय कमी आई है, क्योंकि श्रद्धालु अब बसों के आगमन की सटीक जानकारी प्राप्त कर पा रहे हैं। डिजिटल प्रदर्शन पट्टिकाएं हैदराबाद स्थित एक निजी प्रौद्योगिकी संस्था द्वारा दान की गई हैं तथा तकनीकी सहयोग एक हरित परिवहन कंपनी द्वारा प्रदान किया गया है। विद्युत बसों के संचालन से ईंधन की खपत में कमी आई है और प्रदूषण नियंत्रण में भी सहायता मिल रही है, जो देवस्थानम् के पर्यावरण-अनुकूल परिवहन लक्ष्य के अनुरूप है। अधिकारियों ने शीघ्र ही 20 अतिरिक्त रात्रिकालीन फेरों की शुरुआत करने की योजना बनाई है, जिससे निःशुल्क परिवहन सेवा और अधिक सुदृढ़ होगी।
सबसे बड़ा रथ मंदिर कौन सा है?
विश्व का सबसे बड़ा रथ मंदिर बृहदेश्वर मंदिर को माना जाता है, जिसे रथ के आकार की वास्तुकला शैली में बनाया गया है। हालांकि पारंपरिक “रथ यात्रा” के संदर्भ में जगन्नाथ मंदिर का रथ उत्सव सबसे विशाल और प्रसिद्ध है। पुरी की रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विशाल रथ निकाले जाते हैं, जो विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।
श्रीवारी कौन है?
यह संबोधन दक्षिण भारत में भगवान भगवान वेंकटेश्वर के लिए आदरपूर्वक प्रयोग किया जाता है। आंध्र प्रदेश के तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर में विराजमान देवता को भक्त “श्रीवारी” कहकर पुकारते हैं। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
श्रीवारी सेवा के नियम क्या हैं?
तिरुमला में सेवा करने के लिए पंजीकरण अनिवार्य होता है, जो आमतौर पर आधिकारिक प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। सेवा अवधि के दौरान साधारण और पारंपरिक वस्त्र पहनना आवश्यक है। अनुशासन, समयपालन और मंदिर प्रशासन के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है। सेवा निःशुल्क होती है और चयन प्रक्रिया सीमित स्थानों के आधार पर की जाती है।
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