फुटबॉल चैंपियनशिप-2026 की तैयारियों की समीक्षा
हैदराबाद। तेलंगाना पुलिस विभाग द्वारा आयोजित 74वीं बी.एन. मुल्क मेमोरियल अखिल भारतीय पुलिस फुटबॉल चैंपियनशिप-2026 की तैयारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बुधवार को राज्य के डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी (DGP B. Shivadhar Reddy) ने की। यह महाकुंभ अगले महीने 23 मार्च से 5 अप्रैल तक हैदराबाद में आयोजित होगा। डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि देशभर के पुलिस फुटबॉल खिलाड़ियों और केंद्रीय सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के स्वागत के लिए सिकंदराबाद, नामपल्ली, काचीगुड़ा रेलवे स्टेशन (Kachiguda Railway Station) और शमशाबाद एयरपोर्ट पर विशेष रिसेप्शन टीमें तैनात की जाएंगी।
लाइजन ऑफिसर आवंटित किया जाएगा प्रत्येक टीम को
प्रत्येक टीम को हिंदी और अंग्रेजी में पारंगत एक लाइजन ऑफिसर आवंटित किया जाएगा, जो खिलाड़ियों की आगमन से लेकर प्रस्थान तक सभी जिम्मेदारियों का पालन करेंगे। इसके अलावा खिलाड़ियों के रहने और परिवहन की व्यवस्था भी लाइजन ऑफिसर देखेंगे। समीक्षा बैठक में आरबीवीआरआर टीजीपीए निदेशक अभिलाषा बिष्ट, अतिरिक्त डीजीपी महेश एम. भगवत, अनिल कुमार, संजय कुमार जैन, सीपी अविनाश महंती, डॉ. एम. रमेश, आईजीपी गजराज भूपाल, रमेश नायुडू, अतिरिक्त सीपी तफसीर इकबाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। डीजीपी ने अधिकारियों से कहा कि सभी सुरक्षा, स्वागत और आयोजन व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं, ताकि यह प्रतियोगिता सफल और यादगार बने।
पुलिस को कौन सस्पेंड कर सकता है?
निलंबन का अधिकार आमतौर पर संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के पास होता है। थाने स्तर पर यह अधिकार पुलिस अधीक्षक (SP) या उससे ऊपर के अधिकारी को होता है। बड़े पदों के मामलों में राज्य सरकार या गृह विभाग भी कार्रवाई कर सकता है। विभागीय नियमों और सेवा शर्तों के अनुसार जांच के आधार पर निलंबन किया जाता है।
DGP या IAS कौन अधिक शक्तिशाली है?
Director General of Police राज्य पुलिस बल का सर्वोच्च अधिकारी होता है और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालता है। वहीं Indian Administrative Service (IAS) अधिकारी प्रशासनिक ढांचे में नीति निर्माण और शासन संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की शक्तियां अलग-अलग क्षेत्रों में होती हैं; एक पुलिस व्यवस्था का प्रमुख होता है, जबकि दूसरा प्रशासनिक तंत्र का हिस्सा होता है।
अगर पुलिस आपकी मदद न करे तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) या उच्च अधिकारी से लिखित शिकायत की जा सकती है। राज्य पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा न्यायालय में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत आवेदन देकर एफआईआर दर्ज कराने का अनुरोध किया जा सकता है। मानवाधिकार आयोग या लोक शिकायत प्रकोष्ठ में भी शिकायत करने का विकल्प उपलब्ध है।
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