पारा 39°C तक पहुंचा, मौसम ने लिया अचानक करवट
यूपी में तापमान लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में 20 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। लोगों को तेज हवा और अस्थिर मौसम के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
राजधानी समेत कई शहरों में पारा 39°C तक
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 39°C तक पहुंच गया है।
- दिन का तापमान सामान्य से काफी अधिक
- धूप में बाहर निकलना हुआ मुश्किल
- गर्मी से राहत के लिए लोग ठंडे पेय और पानी का सेवन बढ़ा रहे हैं
यूपी में धुंध और भीषण गर्मी पड़ रही है। पारा (39°C) तक पहुंच गया है। गोरखपुर समेत 10 जिलों में शुक्रवार को चौथे दिन भी धुंध दिखाई दी। कुछ जगहों पर विजिबिलिटी 50 से 100 मीटर तक सिमट गई। इस बीच, उत्तराखंड में बर्फबारी शुरू हो गई है। इसका सीधा असर यूपी में भी देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में ठंडी हवाएं चलेंगी। पारे में गिरावट आएगी।
मौसम विभाग ने बताया- पहाड़ों पर बर्फबारी के अलावा एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इससे प्रदेश में 15 मार्च से बारिश और आंधी का सिलसिला शुरू होगा। (Kashi-Kanpur) काशी-कानपुर समेत 20 जिलों में रुक-रुक कर बारिश होगी। यह सीजन की पहली बारिश होगी। इससे पिछले कई दिनों से सामान्य से ऊपर चल रहे तापमान में गिरावट आएगी। ठंडी हवाएं हल्की ठंड का एहसास कराएंगी।
पिछले 24 घंटे की बात करें तो बांदा सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.8°C दर्ज किया गया। इसके अलावा झांसी, आगरा, उरई और हमीरपुर में पारा 37°C के पार पहुंच गया। काशी में पारे में उछाल आया। इसके बाद विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को धूप और गर्मी से बचाने के लिए जर्मन हैंगर लगवाए हैं।
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काशी-गोरखपुर समेत 20 जिलों में बारिश का अलर्ट
अतुल कुमार सिंह ने बताया- बारिश का मुख्य असर तराई इलाकों और पूर्वांचल में देखने को मिल सकता है। तराई क्षेत्र लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और पीलीभीत और पूर्वांचल क्षेत्र के गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, मऊ, बलिया, वाराणसी, कानपुर, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर और आजमगढ़ के आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
क्या धुंध से फसलों को होगा नुकसान?
- कृषि विशेषज्ञ विनोद पाण्डेय ने कहा – इस प्रकार के मौसम का रबी फसलों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। सरसों की फसल के लिए धुंध और नमी माहू कीट के प्रकोप के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती हैं।
- उन्होंने बताया कि माहू कीट पौधों की कोमल पत्तियों और तनों से रस चूसता है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं। इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है और फली व दानों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में कमी आ सकती है।
- हालांकि, उन्होंने बताया- यही मौसम गेहूं की फसल के लिए अपेक्षाकृत लाभकारी हो सकता है। वातावरण में हल्की ठंड और नमी से गेहूं के पौधों की वृद्धि और दानों के भराव की प्रक्रिया बेहतर होती है, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है।
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