इस्लामाबाद । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब दक्षिण एशिया के कई क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के बाद क्षेत्र में बढ़ी अनिश्चितता का प्रभाव पाकिस्तान के उत्तरी इलाके (Gilgit-Baltistan) पर भी पड़ा है। यहां पेट्रोल की कीमतों में अचानक करीब 55 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि होने से आम जनजीवन प्रभावित हो गया है और स्थानीय स्तर पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
ईंधन महंगा होने से बढ़ी लोगों की परेशानी
स्थानीय नेताओं के अनुसार ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। क्षेत्रीय राजनेता (Shafqa Ali Inqalabi) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर सीधे आम नागरिकों पर पड़ रहा है। पेट्रोल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ गई है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
परिवहन महंगा, जरूरी सामान के दाम बढ़े
पहाड़ी और दूरस्थ इलाके होने के कारण (Gilgit-Baltistan) में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ईंधन पर निर्भर है। पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन का किराया बढ़ गया है। इसका असर फल, सब्जियों और अन्य जरूरी सामान की कीमतों पर भी पड़ा है, जिससे स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ गया है।
शिक्षा और दैनिक गतिविधियों पर असर
ईंधन संकट के कारण कई क्षेत्रों में स्कूलों और अन्य संस्थानों के संचालन पर भी असर पड़ा है। परिवहन और संचालन लागत बढ़ने से कुछ शिक्षण संस्थानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आर्थिक गतिविधियों पर इसका और व्यापक असर पड़ सकता है।
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क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी असर
विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। ऊर्जा आपूर्ति और परिवहन लागत बढ़ने से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक स्तर पर स्थिति स्थिर नहीं हुई तो इसका असर अन्य देशों के बाजार और ऊर्जा कीमतों पर भी पड़ सकता है।
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