नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री (Union Minister) जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और औद्योगिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में औद्योगिक विस्तार के साथ विनिर्माण क्षेत्र मजबूत हो रहा है, वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह और डिजिटल कनेक्टिविटी में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में कोयले की अहम भूमिका
मंत्री ने बताया कि भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में कोयला अहम भूमिका निभा रहा है। देश में लगभग 400 बिलियन टन कोयला भंडार है और करीब 74 प्रतिशत बिजली उत्पादन कोयले से होता है। वर्ष 2024-25 में कोयले की मांग 1 बिलियन टन रही, जो 2047 तक बढ़कर 1.7 बिलियन टन होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उर्वरक और हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा
कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के माध्यम से सिंथेटिक गैस तैयार कर स्वच्छ ईंधन, उर्वरक और हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारत कच्चे तेल का लगभग 83 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत और मिथेनॉल व उर्वरकों का 90 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। वैश्विक परिस्थितियों और आपूर्ति में बाधाओं के कारण यह चुनौती और बढ़ सकती है। ऐसे में कोयला गैसीफिकेशन इस समस्या का प्रभावी समाधान बन सकता है। उन्होंने कहा कि 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीफिकेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए नेशनल कोल गैसीफिकेशन मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत 8,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। साथ ही, भूमिगत कोयला गैसीफिकेशन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
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