एक शांत विदाई: बेटे को मुस्कुराकर विदा करने की कोशिश
हरीश राणा के अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। परिवार और रिश्तेदारों की आंखों में आंसू थे, लेकिन पिता ने सबको संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि कोई भी रोए नहीं, ताकि हरीश शांति से इस दुनिया से विदा ले सके।
पिता का दर्द: “बेटा शांति से जाए”
भावनाओं को रोककर दिखाई हिम्मत
हरीश राणा के पिता (Harish Rana) का दर्द साफ झलक रहा था, लेकिन उन्होंने अपने आंसुओं को रोकते हुए सभी से धैर्य रखने की अपील की। उनका कहना था कि बेटे की आखिरी इच्छा शांति थी, और उसी सम्मान के साथ उसे विदा करना चाहिए।
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हाथ जोड़कर की अपील
उन्होंने सभी से कहा:
“कोई रोना मत… मेरा बेटा शांति से जाना चाहता है।”
इच्छामृत्यु पाने वाले (Euthanasia) गाजियाबाद के हरीश राणा का अंतिम संस्कार हो गया है। दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में बुधवार सुबह 9.40 बजे छोटे भाई आशीष ने मुखाग्नि दी। इससे पहले हरीश का पार्थिव शरीर श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा (62) ने बेटे हरीश को आखिरी बार प्रणाम किया। पिता ने रोते हुए लोगों के सामने हाथ जोड़े और कहा-
कोई रोना मत। बेटा शांति से जाए, इसलिए प्रार्थना कर रहा हूं। बेटा अब जहां जन्म लें, उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।
31 साल के हरीश ने कल यानी 24 मार्च को दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली थी। वे 13 साल से कोमा में थे। डॉक्टर्स के मुताबिक, परिवार ने हरीश के फेफड़े, दोनों किडनी और आंखों के कॉर्निया दान किए हैं। इससे छह लोगों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है।

आशीष राणा ने बड़े भाई हरीश को मुखाग्नि दी। अंतिम बार भाई को हाथ जोड़कर प्रणाम किया।
हरीश को एम्स में पैसिव यूथेनेशिया दिया गया। इसका मतलब होता है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए जो बाहरी लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा है, उसे रोक दिया जाए या हटा लिया जाए, ताकि मरीज की प्राकृतिक रूप से मौत हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। यह देश का पहला मामला है, जिसमें किसी को इच्छामृत्यु दी गई थी। हरीश को 14 मार्च को गाजियाबाद वाले घर से दिल्ली एम्स में शिफ्ट किया गया। 16 मार्च को हरीश की फीडिंग ट्यूब (खाने की नली) हटा दी थी।
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