अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटा था बेटा
एक बेटा अपनी मां के निधन के बाद पिंडदान की तैयारियों में जुटा हुआ था। घर में शोक का माहौल था और परिजन अंतिम धार्मिक रस्मों की तैयारी कर रहे थे।
तभी बजी फोन की घंटी…
एक कॉल ने पलट दी पूरी कहानी- इसी बीच अचानक बेटे के मोबाइल की घंटी बजी। जैसे ही उसने फोन उठाया, दूसरी तरफ से आई आवाज ने उसे स्तब्ध कर दिया। यह वही आवाज थी, जिसे वह अपनी मां की मान चुका था।
ढाई साल पहले अस्पताल से लापता हुई मानसिक रूप से अस्वस्थ वेंकटालक्ष्मी (Venkatalakshmi) को मृत मानकर जब परिवार उनके पिंडदान की तैयारी कर रहा था, तभी एक फोन कॉल ने खुशियां लौटा दीं. क्या है पूरा मामला चलिए जानते हैं…
भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) से कुदरत के करिश्मे और मानवीय संवेदनाओं की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं. जिस मां को मरा हुआ मानकर बेटा उसके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था, वो ढाई साल बाद अचानक ‘जिंदा’ लौट आई. यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन प्रकाशम जिले में यह हकीकत बनकर सामने आई है।
आंध्र प्रदेश प्रकाशम जिले के एल. कोटा गांव की रहने वाली वेंकटालक्ष्मी मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं. करीब ढाई साल पहले, जब परिजन उन्हें इलाज के लिए गुंटूर के एक अस्पताल ले गए, तो वह वहां से अचानक लापता हो गईं. परिजनों ने उन्हें हर जगह तलाशा, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला. दुखद बात ये रही कि पत्नी के वियोग में तीन दिन बाद ही उनके पति का भी निधन हो गया. समय बीतता गया और परिवार की उम्मीदें धुंधली पड़ती गईं।
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अंतिम संस्कार की तैयारी और वो फोन कॉल
ढाई साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद, जब वेंकटालक्ष्मी का कोई पता नहीं चला, तो परिवार ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें मृत मान लिया. घर में उनके अंतिम संस्कार (पिंडदान/श्राद्ध) की तैयारियां चल रही थीं. तभी अचानक खम्मम के अन्नम सेवा आश्रम से एक फोन आया. फोन पर मिली खबर ने पूरे परिवार के होश उड़ा दिए. सामने से बताया गया- आपकी मां जीवित हैं और हमारे पास सुरक्षित हैं।
वेंकटालक्ष्मी सड़कों पर भटकती हुई मिली थीं
खम्मम पुलिस को जुलाई 2023 में वेंकटालक्ष्मी सड़कों पर भटकती हुई मिली थीं, जिसके बाद उन्हें सेवा आश्रम में भर्ती कराया गया. आश्रम के संचालक अन्नम श्रीनिवास राव ने बताया कि लंबे इलाज और देखभाल के बाद उनकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ. ठीक होते ही उन्होंने अपने गांव और बेटे गुरवैया के बारे में जानकारी दी।
जब बेटा गुरवैया आश्रम पहुंचा, तो अपनी मां को जीवित देख वह फफक-फफक कर रो पड़ा. ढाई साल का दर्द और बिछड़ने का गम आंसुओं के जरिए बह निकला. आश्रम के आयोजकों ने परिवार को सम्मानित कर वेंकटालक्ष्मी को उनके बेटे को सौंप दिया।
यह घटना हमें सिखाती है कि सेवा और समर्पण कभी व्यर्थ नहीं जाता. अन्नम सेवा आश्रम जैसे संस्थानों की वजह से ही आज एक बेटा अपनी मां से मिल सका और एक घर की खुशियां वापस लौट आईं. जो घर कल तक शोक की तैयारी कर रहा था, वहां आज उत्सव का माहौल है।
आंध्र प्रदेश का पुराना नाम क्या था?
सही उत्तर मद्रास है। आंध्र प्रदेश का गठन 1 अक्टूबर 1953 को हुआ था, और यह भाषाई आधार पर बनने वाला भारत का पहला राज्य था। यह राज्य मद्रास राज्य (अब तमिलनाडु) से अलग किया गया था, और उस समय कुरनूल इसकी राजधानी थी।
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