Andhra Pradesh Birth Rate: सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) 2022 की प्रतिवेदन के मुताबिक आंध्र प्रदेश में जन्म दर में चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है।
वर्ष 2015 में जहां राज्य में 8.51 लाख बच्चों के जन्म की सूचना मिली थी, वहीं 2022 तक यह आंकड़ा घटकर 7.52 लाख रह गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की ओर इशारा करती है।
बढ़ती जीवनशैली की लागत, बच्चों की परवरिश की चिंता, विवाह में देरी और बढ़ते प्रवास जैसे कारक इस गिरावट के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
आधुनिक जोड़े अब आजीविका, आर्थिक सुरक्षा और व्यक्तिगत जीवन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बच्चों के निर्णय को टाला जा रहा है। छोटे कुटुम्ब की अवधारणा और भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी इस प्रवृत्ति को बढ़ा रही है।

मृत्यु दर में वृद्धि और स्वास्थ्य चुनौतियां
Andhra Pradesh Birth Rate: जहां जन्म दर में कमी दर्ज की गई है, वहीं निधन दर में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। सल 2018 में 3.75 लाख मृत्यु की तुलना में, 2022 में यह आंकड़ा 4.30 लाख तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों ने इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से कोरोना महामारी को उत्तरदायी ठहराया है।
कोविड-19 के दौरान राज्य में भारी संख्या में मौतें हुईं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की कमियां उजागर हुईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और जनकल्याण योजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सरकार को जनसंख्या नियंत्रण, विश्वास निर्माण और आर्थिक सहयोग जैसे प्रदेशों में सशक्त पहल करनी चाहिए, ताकि युवा जोड़े कुटुम्ब बढ़ाने को लेकर फैसला ले सकें।
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