1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान का सहयोग करने वालो पर अब बांग्लादेश में क़ानूनी प्रकिया शुरू हो गयी है। सरकारी वकील ने बताया कि अजहरुल को बरी करने का फैसला प्रधान न्यायाधीश सैयद रिफात अहमद की अध्यक्षता में पूर्ण सात सदस्यीय पीठ ने लिया।
अंतर्राष्ट्रीय अदालत से मिली मौत की सजा को शीर्ष अदालत ने पलटा
शीर्ष कोर्ट ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) द्वारा अजहरुल को सुनाई गई मौत की सजा को भी रद कर दिया। प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के विधि सलाहकार आसिफ नजरूल ने इस फैसले का स्वागत किया है।
सरकारी वकील ने बताया कि अजहरुल को बरी करने का फैसला प्रधान न्यायाधीश सैयद रिफात अहमद की अध्यक्षता में पूर्ण सात सदस्यीय पीठ ने लिया। अदालत ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि अजहरुल को अन्य मामलों में गिरफ्तार नहीं किया गया है, तो उसे तुरंत जेल से रिहा किया जाए।
क्या-क्या लगे थे आरोप?
73 वर्षीय अज़हरुल इस्लाम 1971 में पाकिस्तान के समर्थन में थे और उन पर नरसंहार, हत्या और बलात्कार जैसे कई गंभीर आरोप थे. 2014 में अंतरराष्ट्रीय अपराध मामले में इसे मौत की सजा दी गयी थी , लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले बरी कर दिया है.
राजनीतिक माहौल में बड़ा उलटफेर
पूर्व अंतरिम सरकार के कानून सलाहकार और प्रोफेसर असिफ नजरुल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह पिछले साल के छात्र आंदोलन का परिणाम है जिसने 5 अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था.
नजरुल ने सोशल मीडिया पर लिखा, “न्याय की इस नई संभावना का “न्याय की इस नई संभावना का श्रेय जुलाई-अगस्त के जनआंदोलन नेतृत्व को जाता है.