8.90% तक ब्याज और निवेश की समय सीमा
मुंबई: अडाणी(Adani) ग्रुप की प्रमुख कंपनी ‘अडाणी एंटरप्राइजेज’ का तीसरा पब्लिक बॉन्ड इश्यू (NCD) आज यानी 6 जनवरी 2026 से खुल गया है। इसमें निवेश करने की अंतिम तारीख 19 जनवरी है। कंपनी ने निवेशकों को 8.90% तक के आकर्षक ब्याज(Attractive Interest) का प्रस्ताव दिया है, जो कई बड़े बैंकों की FD दरों (7-7.50%) से काफी अधिक है। इसमें निवेश के लिए 2 साल, 3 साल और 5 साल के तीन विकल्प मौजूद हैं। खास बात यह है कि कुल इश्यू का 35% हिस्सा आम यानी रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व रखा गया है।
निवेश का तरीका और सुरक्षा की गारंटी
इस बॉन्ड में निवेश करना शेयर खरीदने जितना ही आसान है। आपके पास एक डीमैट अकाउंट होना चाहिए और आप अपने ब्रोकर ऐप (जैसे जीरोधा या अपस्टॉक्स) के ‘NCD/Bonds’ सेक्शन में जाकर न्यूनतम ₹10,000 से निवेश शुरू कर सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज से इन्हें ‘सिक्योर्ड’ NCD की श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब(Adani) है कि यदि कंपनी भविष्य में किसी संकट में आती है, तो उसकी संपत्तियों को बेचकर सबसे पहले बॉन्ड होल्डर्स का पैसा लौटाया जाएगा। साथ ही, CARE और ICRA जैसी एजेंसियों ने इसे AA- रेटिंग दी है, जो निवेश की उच्च सुरक्षा को दर्शाता है।
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जोखिम और विशेषज्ञ की राय
अधिक रिटर्न के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े होते हैं। चूँकि यह अडाणी(Adani) ग्रुप का बॉन्ड है, इसलिए किसी भी बाहरी विवाद (जैसे हिंडनबर्ग मामला) का असर बॉन्ड की मार्केट वैल्यू पर पड़ सकता है। इसके अलावा, रेटिंग में बदलाव और लिक्विडिटी (नकद में बदलने की सुविधा) की कमी अन्य संभावित जोखिम हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को ‘एक ही टोकरी में सारे अंडे’ रखने के बजाय, अपने कुल पोर्टफोलियो का केवल 10% से 15% हिस्सा ही कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में लगाना चाहिए। कंपनी इस राशि का 75% हिस्सा अपना पुराना कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल करेगी।
NCD क्या है और क्या इसे शेयर में बदला जा सकता है?
NCD का अर्थ है ‘नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर’। यह एक तरह का लोन (कर्ज) इंस्ट्रूमेंट है जिसके जरिए कंपनियां पैसा जुटाती हैं और निवेशकों को तय ब्याज देती हैं। इन्हें कंपनी के इक्विटी शेयरों में नहीं बदला जा सकता, इसीलिए इन्हें ‘नॉन-कन्वर्टिबल’ कहा जाता है।
अडाणी के इस बॉन्ड इश्यू में न्यूनतम निवेश कितना है और इसमें ‘ग्रीन शू ऑप्शन’ क्या है?
इसमें निवेश(Adani) करने के लिए न्यूनतम ₹10,000 की राशि जरूरी है। ‘ग्रीन शू ऑप्शन’ का मतलब है कि यदि निवेशकों की मांग ₹500 करोड़ के मूल इश्यू से ज्यादा होती है, तो कंपनी अतिरिक्त ₹500 करोड़ (कुल ₹1000 करोड़) तक का निवेश स्वीकार करने का अधिकार रखती है।
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