AI: AI विजन 2047: भारत बनेगा दुनिया की टॉप-3 एआई महाशक्ति

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नौकरी और तकनीक: क्षमता बढ़ाने का माध्यम

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई (AI) को लेकर युवाओं के मन में व्याप्त डर को दूर करते हुए इसे एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतिहास(History) गवाह है कि नई तकनीक नौकरियां खत्म नहीं करती, बल्कि उनका स्वरूप बदल देती है। सरकार का लक्ष्य एआई के माध्यम से डॉक्टरों, शिक्षकों और वकीलों की कार्यक्षमता को बढ़ाना है ताकि वे अधिक लोगों की सेवा कर सकें। भारत आज एआई अपनाने में दुनिया में तीसरे स्थान पर है और सरकार बड़े स्तर पर स्किलिंग और री-स्किलिंग कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को भविष्य के कार्यबल के लिए तैयार कर रही है

सुरक्षा और नैतिकता: ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’

एआई के दुरुपयोग, विशेषकर डीपफेक और डेटा सुरक्षा को लेकर पीएम ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने ‘इंडिया एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट’ और ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट’ का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक का उद्देश्य सबका कल्याण होना चाहिए। भारत ने एआई कंटेंट पर वॉटरमार्किंग और हानिकारक मीडिया को हटाने के नियम बनाए हैं। पीएम ने वैश्विक समुदाय से भी आग्रह किया है कि एआई के लिए विमानन क्षेत्र जैसे सामान्य सिद्धांत (Common Principles) बनाए जाएं, जिसमें मानवीय निगरानी और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

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विकसित भारत 2047: गांव-गांव तक एआई का प्रभाव

प्रधानमंत्री के विजन में ‘आत्मनिर्भर एआई’ का मतलब भारत द्वारा अपना डिजिटल कोड खुद लिखना है। हेल्थकेयर में बीमारियों की शुरुआती पहचान, शिक्षा में स्थानीय भाषाओं के जरिए शिक्षण और कृषि में मौसम की सटीक जानकारी के लिए एआई का उपयोग शुरू हो चुका है। ‘अमूल’ जैसे उदाहरणों के माध्यम से 36 लाख महिला किसानों को एआई से जोड़ा गया है। भारत अब केवल एआई का उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाकर एक वैश्विक निर्माता के रूप में उभरेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के संदर्भ में ‘FORCE MULTIPLIER’ शब्द का प्रयोग क्यों किया?

पीएम का मानना है कि एआई इंसानों को रिप्लेस करने के बजाय उनकी ताकत को कई गुना बढ़ा देगा। जैसे एक डॉक्टर एआई की मदद से कम समय में ज्यादा मरीजों का सटीक इलाज कर पाएगा या एक शिक्षक बेहतर तरीके से समझा पाएगा, ठीक वैसे ही यह तकनीक हर पेशेवर की उत्पादकता बढ़ाएगी।

डीपफेक और एआई के गलत इस्तेमाल से निपटने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

सरकार ने जनवरी 2025 में ‘इंडिया एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट’ लॉन्च किया है। इसके अलावा, एआई जनरेटेड कंटेंट पर वॉटरमार्किंग अनिवार्य की गई है और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के जरिए नागरिकों के डेटा को सुरक्षित रखने के कड़े नियम बनाए गए हैं।

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Dhanarekha

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